वाराणसी, अक्टूबर 11 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर शुक्रवार कर्क चतुर्थी को महिलाओं ने करवा-चौथ का निराजल व्रत रखा। विधिवत पूजन-अर्चन कर सुहाग की रक्षा की कामना की। पूजन के बाद रात 08:03 बजे चंद्रोदय के बाद अर्घ्यदान किया। सुहागिनों ने चलनी की ओट से चंद्रमा और पति का दीदार साथ किया। जिन महिलाओं को यह व्रत करते 12 अथवा 16 वर्ष पूरे हुए उन्होंने उद्यापन भी किया। करवा चौथ व्रत के दौरान सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया करवा भरने की पूरी की गई। मिट्टी और पीतल के करवा के आसपास महिलाओं ने सुहाग की निशानियां सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ी, आलता, बिंदी, वस्त्रादि सहित शृंगार की अन्य सामग्री यत्नपूर्वक सजाईं। संपन्न परिवार की महिलाओं ने चांदी के करवा में सोने के आभूषण भी सजाए। इसके बाद भगवान गणपति, चौथ माता और करवा माता की पूजा की ...
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