चंडीगढ़ , मार्च 15 -- हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी की साजिश रची थी। गिरफ्तारी के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
एसीबी ने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड में तैनात नियंत्रक वित्त एवं लेखा राजेश सांगवान और हरियाणा विद्यालय शिक्षा परियोजना परिषद में कार्यरत नियंत्रक वित्त एवं लेखा रणधीर सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि दोनों अधिकारियों ने जानबूझकर वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग की योजना बनाई।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, अधिकारियों ने विभागीय धनराशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश करने की अनुमति दी, लेकिन बैंक प्रबंधन ने उस राशि को एफडी में जमा करने के बजाय शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिया। आरोप है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई और इसके बदले बड़ी रकम रिश्वत के रूप में प्राप्त की।
इस मामले में सावन ज्वेलर्स के मालिक राजन को भी गिरफ्तार कर चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जबकि आरोपी अंकुर शर्मा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि ज्वेलर्स के माध्यम से नकदी को कैसे कन्वर्ट किया गया।
एसीबी के अनुसार, राजन ने मुख्य आरोपियों के लिए नकदी को सोने के लेन-देन के जरिए सफेद करने का काम किया और इसके बदले भारी कमीशन लिया। आरोप है कि उसने विभिन्न फर्मों और कंपनियों के नाम पर सोने के आभूषणों की फर्जी बिक्री दिखाकर धन को वैध बनाने की कोशिश की।
जांच के दौरान सरकारी कर्मचारियों के फ्रॉड में शामिल होने और रिश्वत लेने के प्रमाण मिलने के बाद एसीबी ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 भी जोड़ दी है।
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