चंडीगढ़ , जनवरी 31 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खो-खो केवल एक खेल नहीं बल्कि भारत की भावना संस्कृति और मिट्टी से जुड़ी पहचान का प्रतीक है।
यह खेल साबित करता है कि सीमित संसाधन कभी भी प्रतिभा के आड़े नहीं आते क्योंकि इसके लिए न तो महंगे उपकरणों की आवश्यकता होती है और न ही बड़े बुनियादी ढांचे की। खो-खो से खिलाड़ियों में फुर्ती रणनीति, टीम वर्क अनुशासन और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
मुख्यमंत्री शनिवार को केशव पार्क में आयोजित 35वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय खो-खो चैंपियनशिप (लड़के एवं लड़कियां) के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चैंपियनशिप को औपचारिक रूप से खुला घोषित किया और खो-खो एसोसिएशन के लिए 21 लाख रुपये के अनुदान की घोषणा की।
इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में मंत्रिमंडल मंत्री कृष्ण लाल पंवार और राज्यसभा सांसद सुभाष बराला भी उपस्थित रहे जिन्होंने खिलाड़ियों से बातचीत की और सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने खेलों को लेकर एक स्पष्ट और दूरदर्शी नीति अपनाई है जिसका उद्देश्य हर बच्चे को खेलों से जोड़ना हर गांव में खेल मैदान विकसित करना और प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर देना है। इसी सोच के तहत पूरे वर्ष राज्य भर में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2036 ओलंपिक विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसी पहल इसी सोच का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा को खेलों की नर्सरी कहा जाता है जहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह चैंपियनशिप केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत की खेल संस्कृति युवा शक्ति और उज्ज्वल भविष्य का उत्सव है। उन्होंने बताया कि 12-13 वर्षों के बाद यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता फिर से हरियाणा में आयोजित हो रही है, जिसमें देश भर से 34 टीमें भाग ले रही हैं। पांच दिवसीय टूर्नामेंट 4 फरवरी को संपन्न होगा। उद्घाटन दिवस पर 40 मुकाबले खेले गए।
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