बेंगलुरु , दिसंबर 18 -- रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीके आत्रे ने गुरुवार को कहा कि 2047 तक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनने की भारत की महत्वाकांक्षा के लिये आने वाले दो दशक निर्णायक होंगे।
उन्होंने यहां जैन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि देश की तकनीकी प्रगति को अब शोध की दुनिया में बिकने वाले उत्पादों में बदलने के लिये व्यावहारिक नवाचार के अनुरूप होना चाहिये।
श्री आत्रे ने कहा, "भारत ने एयरोस्पेस, रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अगर हमें 2047 के अपने विकास लक्ष्यों को हासिल करना है तो अगले दशक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आगाह किया कि भारत के पास शोध का एक महत्वपूर्ण आधार है लेकिन वह पूरी तरह से सैद्धांतिक प्रगति पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ तकनीक पर चर्चा करना या सिमुलेशन चलाना ही काफी नहीं है। हमारे प्रयासों से देश और वैश्विक बाज़ार के लिए ठोस परिणाम मिलने चाहिए।
श्री आत्रे ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब एयरोस्पेस और कृषि से लेकर परिवहन, स्वास्थ्य सेवा, विपणन और अर्थशास्त्र तक लगभग हर क्षेत्र में फैल गयी है, जो राष्ट्रीय विकास को गति देने के लिये व्यावहारिक टेक्नोलॉजी की विशाल क्षमता को दर्शाता है।
श्री आत्रे ने छात्रों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों से भारत को एक वैश्विक तकनीकी अगुवा के रूप में देखने और ऐसे समाधान तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया जो घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय दोनों बाज़ारों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों।
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