अमरोहा , दिसंबर 06 -- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाखों किसानों की तक़दीर बदलने वाली करोड़ों रुपये की नहर परियोजना 17 साल से अधर में लटकी हुई है।
नहर बनाओ संघर्ष समिति संयोजक व जागरूक किसान चौधरी शिवराज सिंह द्वारा पश्चिम उत्तर प्रदेश में नहर बनवाने के लिए काफ़ी संघर्ष किया था। इसके लिए कई बार केंद्रीय मंत्रियों के चक्कर काटने पर वर्ष 1999 में तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री चौधरी शीशराम ओला द्वारा उनके प्रस्ताव को शामिल करते हुए संसद से 13 नहर परियोजनाओं को स्वीकृत कराया था। जागरूक किसान के रूप में भाकियू (संयुक्त मोर्चा) राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी नहर निर्माण शुरू कराने के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं।योगी सरकार के तत्कालीन जल संसाधन मंत्री डॉ महेंद्र सिंह से मुलाकात कर उनको नहर चालू होने से क्षेत्र की खुशहालीको लेकर स्थलीय निरीक्षण कराया गया था।
श्री चौधरी का कहना है कि परियोजना को लंबित करने से ही इसका बजट एक हज़ार करोड़ से पांच हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया।यदि सरकारी मशीनरी सक्रियता के साथ परियोजना पर काम करती तो अब तक इस नहर का लाभ डार्क ज़ोन घोषित मुरादाबाद मंडल के चारों जिलों के किसानों को मिलता।
उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडल के बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद तथा सम्भल की लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित करने के लिये मध्य गंगा नहर का निर्माण 17 वर्ष पहले वर्ष 2008 में बिजनौर में गंगा नदी पर बने चौधरी चरणसिंह बैराज से शुरू हुआ था, वर्ष 2011 में परियोजना का बजट 1060.76 करोड़ रुपये था, जो कि 2016 में बढ़कर 4417.21 करोड़ रुपये हो गया था,अब 2025 में बढ़कर 4900 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उक्त महत्वाकांक्षी परियोजना से 1,850 गांवों के साथ 4.10 लाख किसान लाभान्वित होंगे, लेकिन एक समान मुआवजे से इतर दोगुने मुआवजे को लेकर अमरोहा जिले में नहर निर्माण कार्य ठप्प है। इस नहर के चालू होने से चारों जिलों के लगभग चार लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। अकेले अमरोहा जिले के लगभग सवा लाख किसान नहर चालू होने से सिंचाई सुविधा से लाभान्वित हो सकते हैं।
परियोजना की बहजोई शाखा तैयार हो चुकी है। मुरादाबाद होकर चंदौसी शाखा चालू होने में दोगुना मुआवजा रोड़ा बना हुआ है। मुआवजे को लेकर ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें मौजूदा सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा चाहिए, साथ ही उनके इलाके में नहर की चौड़ाई 60 मीटर से घटाकर 30 मीटर की जाए।
इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अन्य ज़मीन मालिकों की मानिंद अपेक्षित मुआवजे की धनराशि जिला भूमि अध्याप्ति अधिकारी के यहां वर्ष 2010 में जमा कराई जा चुकी है। सभी को एक समान दर पर भुगतान संभव है। इस संबंध में मध्य गंगा नहर परियोजना के मुख्य अभियंता केएम कंसल का कहना है कि मध्य गंगा नहर की बहजोई शाखा के चालू होने पर उस क्षेत्र के किसान सिंचाई लाभ उठा रहे हैं, जबकि अमरोहा में निर्माण कार्य अभी भी अधर में लटका हुआ है।
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