पटना , दिसंबर 28 -- बिहार में 15 वर्षों से फरार और तीन- तीन लाख रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली नारायण कोड़ा (जोनल कमांडर), बहादुर कोड़ा (सब- जोनल कमांडर) और बिनोद कोड़ा उर्फ बिनो कोड़ा (दस्ता सदस्य) ने रविवार को पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है।

यह आत्मसमर्पण बिहार एसटीएफ, जिला पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम बताया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और संचार उपकरण बरामद किये गये हैं। इनमें दो 5.56 एमएम इंसास राइफल, चार 7.62 एमएम एसएलआर राइफल, 150 राउंड 5.56 एमएम और 353 राउंड 7.62 एमएम के जिंदा कारतूस, चार एसएलआर मैगजीन, दो इंसास मैगजीन, 10 वॉकी- टॉकी और नौ चार्जर शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि कुख्यात नक्सली नारायण कोड़ा वर्ष 2018 से 2021 के बीच जमुई, मुंगेर और लखीसराय जिलों में हुई कई जघन्य नक्सली घटनाओं में संलिप्त रहा है। इनमें एसएसबी जवान की हत्या, पंचायत प्रतिनिधि के परिजन का अपहरण, पुलिस- नक्सली मुठभेड़, ग्रामीणों की नृशंस हत्या, एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिये पुजारी का अपहरण और हत्या, नव- निर्वाचित मुखिया की हत्या और रेलवे स्टेशन और रेल सुरंग को उड़ाने की धमकी जैसी गंभीर घटनायें शामिल हैं।

वहीं बहादुर कोड़ा भी कई संगीन अपराधों में वांछित रहा है। उस पर अनुसूचित जनजाति के जिला अध्यक्ष की हत्या, फिरौती के लिये अपहरण, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का अपहरण व हत्या और सार्वजनिक स्थलों को उड़ाने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप हैं। दोनों नक्सली पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से फरार थे और इनके खिलाफ लखीसराय, जमुई और मुंगेर जिलों के विभिन्न थानों में 23 से अधिक गंभीर नक्सली मामले दर्ज हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों, खुफिया सूचनाओं और सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण इन नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिये मजबूर होना पड़ा। आत्मसमर्पण के बाद राज्य सरकार की आत्मसमर्पण- सह- पुनर्वास योजना के तहत इन्हें मुख्यधारा में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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