पटना , दिसंबर 15 -- िहार की राजधानी पटना की एक विशेष अदालत ने 14 लाख रूपयों की रिश्वत लेने के जुर्म सोमवार को पथ निर्माण विभाग के एक कार्यपालक अभियंता समेत दो लोगों को चार वर्षों तक के सश्रम कारावास की सजा के साथ पांच लाख रूपए तक का जुर्माना भी किया। निगरानी के विशेष न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने मामले में सुनवाई के बाद पथ निर्माण विभाग में पटना पश्चिम प्रमंडल के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सुरेश कुमार सिंह और रोकड़िया शशि भूषण कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देने के बाद यह सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी कार्यपालक अभियंता को चार वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ पांच लाख रुपए का जुर्माना किया है जबकि दोषी रोकड़िया को चार वर्षो के सश्रम कारावास की सजा के साथ तीन लाख रुपए का जुर्माना किया है। जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोनों दोषियों को एक-एक माह के कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी।
मामले के विशेष लोक अभियोजक प्रभारी निगरानी ट्रैप केसेस किशोर कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में एक कंपनी को पटना में सड़क के निर्माण का 40 करोड़ रुपए का ठेका मिला । दोषी कार्यपालक अभियंता एक प्रतिशत के हिसाब से 40 लाख रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे थे और एग्रीमेंट करने में टाल-मटोल कर रहे थे।वरीय अधिकारियों को शिकायत करने पर एग्रीमेंट तैयार हुआ। बाद में सात किलोमीटर सड़क का निर्माण करने के बाद शिकायतकर्ता ने सिक्योर्ड एडवांस की मांग की, तब दोषी कार्यपालक अभियन्ता ने 40 लाख रूपयों के रिश्वत की मांग की। बाद में 32 लाख रुपए की मांग करने लगे। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था इसलिए उसने निगरानी में शिकायत की । आरोपों के सत्यापन के बाद आठ जून 2019 को निगरानी के अधिकारियों ने दोषी कार्यपालक अभियंता के पटेल नगर स्थित आवास पर दोनों दोषियों को 14 लाख रूपयों की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ़्तार किया था । दोषी कार्यपालक अभियंता के आवास की तलाशी में दो करोड़ 36 लाख 23 हजार रुपए नगद बरामद हुए थे। इसके अलावा लाखों रूपयों के निवेश और जमा राशि के भी कागजात बरामद हुए थे। जिसके लिए दोषी कार्यपालक अभियंता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एक अलग मुकदमा किया गया था। अभियोजन ने आरोप साबित करने के लिए इस मामले में तेरह गवाहों का बयान कलम बंद करवाया था ।
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