कोंडागांव/रायपुर , मार्च 18 -- छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने प्रदेश के शासकीय सेवकों की लंबित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से पत्राचार और आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन द्वारा उनकी ज्वलंत मांगों का त्वरित निराकरण नहीं किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है।

फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा, प्रांतीय उप संयोजक केदार जैन और जिला संयोजक शिवराज सिंह ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को संबोधित एक ज्ञापन जारी किया।

ज्ञापन में फेडरेशन ने बताया कि वे पिछले वर्ष 30 जून 2025, एक दिसंबर 2025, 22 अगस्त 2025 एवं 29 से 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने पर फेडरेशन ने 18 मार्च 2026 को जिला एवं विकासखंड स्तर पर भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन किया।

फेडरेशन ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया है। इन मांगों में सबसे प्रमुख "मोदी की गारंटी" के तहत जुलाई 2010 से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) एरियर्स की राशि कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में समायोजित करना है। इसके अलावा कर्मचारियों ने 8, 16, 24 एवं 32 वर्ष की सेवा पर चार स्तरीय पदोन्नति समयमान वेतनमान देने की मांग की है। फेडरेशन ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर अर्जित अवकाश का नगदीकरण 300 दिन करने की भी मांग उठाई है।

विभिन्न विभागों में लंबित वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए फेडरेशन ने पिगुआ कमेटी की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की है। शिक्षकों की पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा गणना कर स्वरूप सेवा लाभ देने, सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को विस्तारित समयमान वेतनमान प्रदान करने की भी मांग रखी गई है।

अनुकंपा नियुक्ति के मामले में फेडरेशन ने सख्त रुख अपनाते हुए 10 प्रतिशत की सीमा (सीलिंग) समाप्त करने और शासकीय सेवा में शीघ्र भर्ती के सभी पदों पर अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की है। पंचायत सचिवों के शासकीयकरण और नगरीय निकायों के कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति देने की भी बात कही गई है।

फेडरेशन का कहना है कि विभिन्न विभागों में सेटअप पुनरीक्षित न होने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है। इस समस्या के समाधान के लिए सभी विभागों में समानता लाते हुए सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने का सुझाव दिया गया है। वहीं, प्रदेश में कार्यरत कार्यभारित, दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग भी की गई है।

फेडरेशन ने आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली और सेवानिवृत्ति के बाद संधि नियुक्ति को तत्काल बंद करने का आग्रह किया है। साथ ही विभागों में रिक्त पदों पर अतिशीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति देने की भी मांग की है।

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