नयी दिल्ली , फरवरी 14 -- दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने शनिवार को यहां बांसेरा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से आयोजित प्रथम 'डीडीए ग्रीन एक्सपो' का उद्घाटन किया और इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी को हरित, स्वच्छ और टिकाऊ शहर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाओं के साथ कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किये।
'वृद्धि से परेः शहरी भविष्य की नयी परिकल्पना' की थीम पर आयोजित इस दो दिवसीय एक्सपो में वरिष्ठ अधिकारी, शहरी नियोजनकर्ता, जलवायु विशेषज्ञ और उद्योग के भागीदार एक मंच पर उपस्थित हुए। इसके पहले दिन यहां के सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए विभिन्न सरकारी और निजी संस्थाओं के साथ विभिन्न सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये। इस मौके पर श्री सक्सेना ने 'डीडीए ग्रीन्स लोगो' और 'डीडीए ग्रीन्स ईयरबुक 2026' का विमोचन किया।
उपराज्यपाल ने ग्रीन एक्सपो के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, " यह एक्सपो दिल्ली के लिए अधिक हरे-भरे, स्वस्थ और अधिक आशापूर्ण भविष्य को लेकर हमारी प्रतिबद्धता मजबूत करता है। "उन्होंने कहा कि यह एक्सपो केवल सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के बारे में नहीं है, बल्कि यह लोगों के बारे में है। यह उन हजारों दिल्ली वासियों के लिए सम्मान का प्रतीक है, जो अपने घरों के बाहर छोटे छोटे हरे-भरे क्षेत्रों का पोषण करते हैं, अपने बच्चों को स्थानीय पक्षियों के बारे में शिक्षा देते हैं, पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं। वे हमारे पर्यावरण की यात्रा के प्रतिदिन के हीरो हैं।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति तीन साल पहले कल्पना नहीं कर सकता था कि इस खराब हो चुके प्रदूषित स्थान पर एक 'ग्रीन एक्सपो' का आयोजन होगा और यह दिल्ली के लिए एक टिकाऊ भविष्य की योजना बनाने का एक मंच बन जाएगा। यह खराब हो चुकी भूमि को फिर से हरा-भरा करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और बांसेरा लचीलेपन और प्रयास का एक गवाह है। उन्होंने कहा कि यह एक्सपो दिल्ली की पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के व्यवहारिक समाधान की पेशकश करता है।
डीडीए के उपाध्यक्ष एन सरवाना कुमार ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण की भूमिका को अक्सर एक मास्टर प्लानर, डेवलपर और नियामक के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इन जिम्मेदारियों के साथ ही डीडीए के पास एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और जवाबदेही भरी भूमिका है और वह दिल्ली के पर्यावरण ट्रस्टी की भूमिका है।
इस दो दिवसीय एक्सपो में टिकाऊ शहरी विकास पर चर्चा करने के लिए नीति निर्माता, नियोजनकर्ता, जलवायु विशेषज्ञ और उद्योग के नेता एक साथ होंगे, यहां की गयी रणनीतिक साझीदारियां इस बात को नये सिरे से परिभाषित करेंगी कि कैसे डीडीए के पार्क इस शहर में काम करते हैं। इन गठबंधनों के जरिए डीडीए ग्रीन्स, मनोरंजन से परे जाकर गतिशील नागरिक प्लेटफॉर्म बनने की दिशा में सीखने, नवप्रवर्तन, पारिस्थितिकी और संस्कृति के लिए जीवंत प्रयोगशालाओं का रूप लेने को तैयार है।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के साथ अपनी तरह की पहली साझीदारी के तहत डीडीए के पार्क सांस्कृतिक कक्षाओं का रूप लेंगे। इस गठबंधन के तहत एनएसडी पार्क स्थलों में क्यूरेटेड कम्युनिटी थिएटर वर्कशाप और बाल नाट्य कार्यक्रमों का आयोजन करेगा जिससे खुले और सार्वजनिक वातावरण में कला प्रदर्शन सुलभ होगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साथ समझौते से पार्क परिदृश्यों के भीतर शहरी पारिस्थितिकी अनुसंधान, विद्यार्थियों के नेतृत्व में मैदान में कार्य और अकादमिक सहभागिता सुगम होगी। दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के साथ गठबंधन से पार्क नियोजन एवं प्रबंधन में प्रौद्योगिकी संचालित टिकाऊपन के समाधान और युवा नवप्रवर्तन शुरू किया जाएगा।
नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के जरिए डीडीए चुनिंदा पार्कों में राष्ट्रीय एवं राज्य महत्व के हर्बल गार्डेन और औषधीय पौधों की नर्सरियां विकसित करेगा, जिससे जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी और भारत की वनस्पति विरासत के साथ नागरिकों का जुड़ाव बढ़ेगा। डब्लूडब्लूएफ-इंडिया के साथ साझीदारी से असिता में सिटिजन्स नेचर हब्स की स्थापना की जाएगी और पर्यावरणीय जागरूकता, नागरिक एवं सामुदायिक प्रबंधन को बढ़ावा दियाजाएगा।
इसके अलावा, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) के दृष्टिकोण को अपनाते हुए डीडीए टिकाऊ शहरी नियोजन, विरासत संवेदनशील हस्तक्षेप और प्रकृति आधारित विकास व्यवस्था में एक नॉलेज पार्टनर के तौर पर सेवा देने के लिए समझौता करेगा। इन समझौतों से उत्कृष्ट संस्थानों के साथ गठबंधन के जरिए अपने हरित क्षेत्रों का दायरा और पहुंच बढ़ाने की डीडीए की प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है। डीडीए के पार्क प्रकृति की पगडंडियों, अनुसंधान पहल, युवा सहभागिता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यावरण की सीख के केंद्र बनने को तैयार हैं जो पारिस्थितिकी, नवप्रवर्तन और सामुदायिक जीवन को दिल्ली के शहरी भविष्य में एकीकृत करने जा रहे हैं।
इस एक्सपो में अत्यधिक गर्मी, बाढ़ को लेकर लचीलापन, प्रकृति आधारित आधारभूत ढांचा, सर्कुलर फूड प्रणाली और हरित शहरों के लिए अनूठे वित्तपोषण सहित अत्यधिक गंभीर शहरी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी परिचर्चा और विशेषज्ञ सत्रों का आयोजन किया जाएगा। वहीं, वरिष्ठ नीति निर्माता और अंतरराष्ट्रीय विकास के नेता भी ऊर्जा दक्ष शहरी डिजाइन, जलवायु के अनुकूल सार्वजनिक क्षेत्रों और लचीले आधारभूत ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए 'जलवायु के प्रति तैयार शहरों के लिए डिजाइनिंग' विषय से आयोजित परिचर्चा में प्रतिभाग करेंगे। यह एक्सपो पारिस्थितिकी संरक्षण और सीएसआर एवं सार्वजनिक निजी साझीदारियों सहित हरित आधारभूत ढांचे के लिए विस्तार योग्य वित्तपोषण मॉडलों के साथ विकास का संतुलन बनाते हुए शहरी खाद्य घेरा जैसी उभरती टिकाऊपन की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेगा।
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