कपूरथला , दिसंबर 23 -- कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मंगलवार को दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदानों की गंभीर याद को 'वीर बाल दिवस' नाम देने पर सवाल उठाया है और कहा है कि ऐसे नामकरण साहिबजादों की अद्वितीय बहादुरी, शहादत और ऐतिहासिक महत्व को बहुत कम करता है।

श्री खैरा ने कहा कि साहिबजादे सिर्फ आम अर्थों में 'बच्चे' नहीं थे, बल्कि आस्था और विवेक के दैवीय प्रेरणा वाले योद्धा थे, जिन्होंने समर्पण के बजाय शहादत को चुना और साहस, धर्म और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध के उच्चतम आदर्शों को बनाये रखा। साहिबजादों ने मुगल साम्राज्य के अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ मजबूती से खड़े होकर मुकाबला किया। उन्होंने जोर देकर कहा, " उनके सर्वोच्च बलिदान को एक ऐसे शब्द में बदलना जो उम्र पर जोर देता है न कि वीरता और शहादत पर, सिख इतिहास और भावनाओं के साथ घोर अन्याय है। "कांग्रेस विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि साहिबजादा बाबा अजीत सिंह, साहिबजादा बाबा जुझार सिंह, साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की शहादत विश्व इतिहास में बलिदान की पराकाष्ठा का प्रतिनिधित्व करती है, जहां सबसे कम उम्र के लोगों ने भी आस्था और मानवीय गरिमा के लिए क्रूर अत्याचार के खिलाफ निडर होकर मुकाबला किया।

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