नयी दिल्ली , अप्रैल 04 -- पशुओं के अधिकारों के प्रति कार्यरत संस्था 'पेटा' ने शनिवार को 'विश्व चूहा दिवस' के अवसर पर लोगों से चूहों के प्रति दयालु होने की अपील की है। संस्था ने चूहे पकड़ने वाले 'ग्लू ट्रैप' (चिपकने वाले जाल) को बेहद क्रूर बताते हुए इसके खिलाफ अभियान छेड़ा है। संस्था का कहना है कि इन जालों में फंसने के बाद छोटे जानवर तड़प-तड़प कर बेहद धीमी और दर्दनाक मौत मरते हैं।

पेटा इंडिया ने सोशल मीडिया पर कहा कि ग्लू ट्रैप में फंसने के बाद खुद को छुड़ाने की हताश कोशिशों में कई जानवर अपने ही अंगों को चबा डालते हैं। संस्था ने तर्क दिया है कि ये जाल समस्या के मूल कारण का समाधान करने में विफल हैं, क्योंकि जब तक भोजन के स्रोत उपलब्ध रहेंगे, अन्य जानवर उनकी जगह लेते रहेंगे।गौरतलब है कि विश्व चूहा दिवस हर साल चार अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2002 में की गयी थी, जिसका मुख्य उद्देश्य पालतू चूहों के प्रति लोगों की धारणा को बदलना, उनके प्रति क्रूरता को रोकना और उन्हें एक बुद्धिमान व सामाजिक जीव के रूप में पहचान दिलाना है।

चूहों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए संस्था ने कुछ मानवीय और दीर्घकालिक समाधान सुझाए हैं, जिनमें भोजन के स्रोतों को हटाना और कचरे के डिब्बों को अच्छी तरह सील करना, छिपने के स्थानों को कम करना, चूहों को दूर रखने के लिए अमोनिया में भीगे हुए कपास या कपड़ों का उपयोग करना, प्रवेश द्वारों को स्टील वूल, सीमेंट या धातु की चादरों से बंद करना तथा मानवीय 'केज ट्रैप' का उपयोग कर पकड़े गये जानवरों की रोजाना जांच करते हुए उन्हें सुरक्षित रूप से घरों से दूर छोड़ना शामिल है।

संस्था ने अपील की है कि इस 'वर्ल्ड रैट डे' पर लोग इन क्रूर जालों के बजाय सुरक्षित और अहिंसक तरीकों को अपनाकर जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखायें।

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