नयी दिल्ली , अप्रैल 10 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने 1999 के कारगिल युद्ध के वीर यौद्धा, महा वीर चक्र से सम्मानित कर्नल सोनम वांगचुक (सेवानिवृत्त) के निधन पर शोक व्यक्त किया है। 'लद्दाख के शेर' के नाम से मशहूर कर्नल वांगचुक का शुक्रवार सुबह लेह में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कर्नल वांगचुक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भारतीय सेना के एक अत्यंत अलंकृत अधिकारी के रूप में वर्णित किया, जो अपने साहस, दृढ़ नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण के लिए प्रसिद्ध थे।

श्री सिंह ने कहा ," लद्दाख के एक गौरवशाली पुत्र, उन्होंने क्षेत्र की भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया-सहनशील, अडिग और राष्ट्र की सेवा में गहराई से रचे-बसे, साथ ही भारत की विविधता में एकता के प्रतीक के रूप में खड़े रहे। ऑपरेशन विजय के दौरान व्यक्तिगत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करने के उनके साहसिक कार्यों ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई की परिस्थितियों में उनके सैनिकों को प्रेरित किया। उनका जीवन साहस, बलिदान और राष्ट्रीय एकता का प्रमाण बना हुआ है, और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेग।"सेना ने भी सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा कि दुख की इस घड़ी में समूची सेना शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है।

सेना ने कहा ," जनरल उपेन्द्र द्विवेदी तथा भारतीय सेना के समस्त पद, कर्नल सोनम वांगचुक, महावीर चक्र को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं । कर्नल सोनम वांगचुक - एक वीर सैनिक, समर्पित सैन्य कमांडर और लद्दाख के ऐसे सुपुत्र थे, जिनका जीवन साहस, सेवा और एकता का प्रतीक रहा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। भारतीयसेना शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करती है तथा इस घड़ी में उनके साथ दृढ़ता से खड़ी है।"कर्नल वांगचुक ने 'ऑपरेशन विजय' में मेजर के रूप में लद्दाख स्काउट्स की चौथी बटालियन का नेतृत्व किया था। उन्होंने चोरबाट ला दर्रे पर कब्जा कर दुश्मन के 136 सैनिकों को मार गिराया था, जिसके लिए उन्हें भारत के दूसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पुरस्कार 'महावीर चक्र' से सम्मानित किया गया था।

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