गाजियाबाद , फरवरी 16 -- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ खुद योगी महासभा के अध्यक्ष हैं इसलिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का उनके 'योगी' होने पर सवाल उठाने का कोई तुक नहीं है।
पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता तथा श्रीदूधेश्वरनाथ पीठ के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि ने सोमवार को यहां कहा कि स्वामी अविमुश्वरानंद के ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य होने पर पहले से सवाल उठ रहे हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ के योगी होने पर सवाल उठाने की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है। उनका कहना था कि श्री आदित्यनाथ जिस योगी सभा के अध्यक्ष हैं वही सभा तय करती है कि किसे योगी नाम की उपाधि देनी है। उनका कहना था कि जो योगी उपाधि देते हैं उनके योगी होने पर ही सवाल कैसे उठाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि योगी महासभा देश में योग परंपरा, सामाजिक समरसता तथा सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए कार्य करने वाले नाथ संप्रदाय के प्रमुख संगठन अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ का लोकप्रिय नाम है। योगी महासभा 1906 में स्थापित योगी संघ का विस्तारित संगठन है जो 12 पंथों और 18 नाथों को एक मंच प्रदान करता है। उनका कहना था कि योगी महासभा का संचालन का काम ज्यादातर समय तक गोरक्षपीठ के महंत ही देखते रहे हैं।
श्रीमहंत ने कहा कि खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शंकराचार्य होने का मामला विवाद में है। यह मामला न्यायालय में है। उनका कहना था कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद परंपरा से है जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उस परंपरा में नहीं आते हैं। शंकराचार्य होने का मामला उन्हीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा विवादित है जो योगी आदित्यनाथ के योगी होने पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन नेताओं की सह पर अविमुक्तेश्वरानंद जी उत्तर प्रदेश के धर्मनिष्ठ मुख्यमंत्री के नाम से पहले योगी शब्द होने पर सवाल उठा रहे हैं उन्हीं के पूर्वज अविमुक्तेश्वरानंद पर लाठी चलावा चुके हैं। उनका कहना था कि जिनके संस्कार सनातन और संत विरोधी रहे हैं उनके वंशजों की राजनीति के अनुकूल कृत्य नहीं करने चाहिए।
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