मुंबई , जनवरी 22 -- महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके पोषण में सुधार लाने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख 'मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना' को ई-केवाईसी से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए भौतिक सत्यापन की शुरुआत के साथ बढ़ावा मिला है।
यह कदम तब उठाया गया है जब डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी दिक्कतों और गलत चुनाव की वजह से हजारों योग्य महिलाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस योजना के तहत, 21 से 65 साल की उम्र की योग्य महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये सीधे उनके बैंक अकाउंट में मिलते हैं। इस योजना का मुख्य मकसद महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और कुल मिलाकर सशक्तीकरण पर ध्यान देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना खासतौर से ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद रही है, जिससे घरों की आर्थिक स्थिरता मज़बूत हुई है। इसके योजना का लाभ वही परिवार उठा सकते हैं, जिनकी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से कम हो। वर्ष 2026 में 3,000 रुपये की डबल किस्त देने पर भी चर्चा हो रही है।
उन्होंने बताया कि कई लाभार्थियों को, खासकर ग्रामीण इलाकों में, डिजिटल पहुंच की कमी, टेक्निकल गड़बड़ियों और गलत विकल्प चुनने की वजह से ई-केवाईसी प्रक्रिया में दिक्कत हुई। ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 31 दिसंबर, 2025 तय होने के साथ ही यह डर बढ़ गया कि कई हकदार महिलाएं इस योजना के फायदों से वंचित रह सकती हैं। इन्हें लागू करने की चुनौतियों की वजह से हजारों आवेदन रुके हुये हैं।
इस समस्या को हल करने के लिए, सरकार ने घर-घर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन करने का फैसला किया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थियों के घरों में जाकर विवरण का सत्यापन और जहां भी ज़रूरी होगा, अभिलेखों को ठीक करेंगी। जिलाधिकारियों को इस प्रक्रिया की देखरेख करने और इसे स्थानीय स्तर पर लागू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी योग्य महिला को तकनीकी कारणों से बाहर न किया जाए। उम्मीद है कि इस कदम से लाभार्थियों को काफी राहत मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने कहा था कि सभी जिलाधिकारियों को तुरंत भौतिक सत्यापन आरंभ करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस कदम से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकार पर महिलाओं का भरोसा मज़बूत होगा। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि किसी भी महिला को तकनीकी दिक्कतों के कारण लाभ से वंचित न किया जाए, जिससे महिला सशक्तीकरण को बड़े पैमाने पर मजबूत किया जा सके।
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