पटना, मार्च 24 -- इंसान की खुशियों में शरीक होने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के गम भी कुछ कम नहीं हैं और उसी दर्द को साझा करता हुआ तथा जेंडर भेदभाव की समस्या को उकेरता हुआ एक स्टॉल पटना के गांधी मैदान में बिहार दिवस समारोह की शोभा बढ़ा रहा है।
गरिमा गृह, खगौल की तरफ से लगाये गए इस स्टॉल को नाम दिया गया है, 'ट्रांसजेंडर कौन है'। इस स्टॉल की पिछली दीवारों पर ट्रांसजेंडर समाज की परेशानियों, उनके अधिकारों और उनकी बेहतर जिंदगी के लिए बिहार सरकार के प्रयासों को प्रदर्शित किया गया है।स्टॉल पर ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि भी बैठे हुए थे, जो लोगों के सवालों के जवाब दे रहे थे और उनसे आग्रह कर रहे थे कि उन्हें भी एक आम इंसान की तरह ही सम्मान की नजरों से देखा जाए।
इस आयोजन में भागीदारी पर्यावरण संरक्षण संस्था तरुमित्र से जुड़ी देवप्रिया दत्ता ने यूनीवार्ता से कहा कि ट्रांसजेंडर भी हमारी तरह के इंसान हैं, लेकिन दूसरे जेंडर के लोग उन्हें समाज से अलग थलग कर देते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक बुराई है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।
स्टॉल पर लोगों की भीड़ के बीच ट्रांसजेंडर प्रतिष्ठा ओझा कहती हैं, "हम भी इंसान हैं और एक आम इंसान की तरह जीना चाहते हैं। लोग हमें सिर्फ घरों में बधाई मांगने और ट्रेन में घूम कर पैसे वसूलने वाले की तरह जानते हैं, जबकि हमारी इच्छा समाज की मुख्य धारा से जुड़ने की है।
ट्रांसजेंडर नूर कहती है, "गरिमा गृह खगौल ने हमे जगह दिया है और वहां की प्रमुख रेशमा प्रसाद हमारी शिक्षा की व्यवस्था कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में पटना वीमेंस कॉलेज में भी ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। उन्होंने कहा कि पहली बार लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के रूप में किसी ट्रांसजेंडर को राज्यसभा के लिए नामित किया गया। उन्होंने नीतीश सरकार की तारीफ की और कहा कि बिहार पुलिस में 38 सबइंस्पेक्टर और 132 पुलिस के पद ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने ट्रांसजेंडर सेल का गठन किया है और पटना नगरपालिका ने ब्रांड एम्बेसडर बना कर ट्रांसजेंडर समाज को सम्मान दिया है।
तरुमित्र की सुश्री दत्ता ने कहा कि बिहार में कई संस्थाएं ट्रांसजेंडर के उत्थान के लिए काम कर रही हैं और बिहार सरकार का नजरिया भी सकारात्मक है, लेकिन उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर लोगों के बीच काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेंडर भेदभाव को दूर करना एक सभ्य समाज की पहली शर्त है।
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