चंडीगढ़ , दिसंबर 28 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने रविवार को कहा कि सरकार को "जी राम जी कानून" का विरोध करने के बजाय राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, लगातार हो रही हत्याओं और लगभग हर दिन आ रही फिरौती की धमकियों पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाना चाहिए।

श्री जाखड़ ने यहां जारी बयान में कहा कि पंजाब के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय आम आदमी पार्टी की सरकार एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की तरह काम कर रही है और विधानसभा के विशेष सत्रों की श्रृंखला में एक और प्रचार जोड़ने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने कहा कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और उनके पास गिनाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है। इसलिए सरकार रोज़ नया प्रचार हथकंडा अपना रही है। "जी राम जी कानून" का विरोध करने के लिए बुलाया जा रहा विशेष सत्र इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पंजाब यात्रा के दौरान हर जिले के लोगों ने इस योजना में हो रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि पिछले चार वर्षों के दौरान इस योजना के तहत पंजाब में हुए भ्रष्टाचार पर श्वेत पत्र जारी किया जाए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि यह सरकार मानती है कि योजना में किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं थी, तो फिर पिछले चार वर्षों में, जब इसे पूरी तरह लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी, पंजाब के गरीबों को 100 दिनों का रोजगार क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों से फॉर्म भरवाकर और अंगूठे लगवाकर उन्हें भ्रमित कर रही है ।

उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए पूछा कि जब केंद्र सरकार योजना में भ्रष्टाचार खत्म कर 100 की बजाय 125 दिनों का काम देने की गारंटी दे रही है, तो आप सरकार को इस पर आपत्ति क्यों है। उन्होंने कहा कि आप सरकार को पंजाब के गरीबों को गुमराह करना बंद करना चाहिए। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान पंजाब के गरीबों को औसतन केवल 26 दिनों का ही रोजगार मिला है, जबकि पिछले वर्षों में भी यह सरकार औसतन सिर्फ 38 दिनों का ही रोजगार दे सकी। उन्होंने कहा कि यह आप सरकार के गरीब-विरोधी चेहरे को उजागर करता है। विशेष सत्रों का यह नाटक केवल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए है।

श्री जाखड़ ने कहा कि अब तक पंजाब विधानसभा के नौ विशेष सत्र बुलाए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल इवेंट बनाकर पेश करने की बजाय सरकार को यह भी जनता के सामने रखना चाहिए कि इन सत्रों से आम पंजाबियों को क्या लाभ मिला।

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