पुणे , जनवरी 08 -- मशहूर पर्यावरणविद माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में उनके आवास पर निधन हो गया।
पश्चिमी घाट के पारिस्थितकीय महत्व पर अध्ययन के लिए जाने जाने वाले श्री गाडगिल (82) ने पारिस्थितिकीय रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि इस क्षेत्र में किसी भी नयी सड़क या भवन निर्माण की अनुमति न दी जाए, खड़ी ढलानों पर कोई विकास कार्य न हो और अन्य पाबंदियों के साथ-साथ पत्थरों के उत्खनन पर भी प्रतिबंध लगाया जाए।
पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित श्री गाडगिल ने जैव विविधता अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर देश की पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
श्री गाडगिल प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार परिषद के सदस्य रहे थे और 2010 में उन्हें 'पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल' का प्रमुख भी नियुक्त किया गया था। इस पैनल को आमतौर पर गाडगिल आयोग के नाम से भी जाना जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 2024 में पर्यावरण क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार 'चैंपियन ऑफ द अर्थ' से सम्मानित किया था।
माधव गाडगिल का जन्म 24 मई, 1942 को पुणे में प्रमिला और धनंजय गाडगिल के घर हुआ था। उनके पिता ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम किया था।
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