श्रीगंगानगर , मार्च 29 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर में विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को राष्ट्रीय कला मंदिर के तत्वावधान में आलोक शुक्ला द्वारा लिखित मार्मिक नाटक 'ख्वाब-एक बुजुर्ग की आत्मकथा' मंचन ने दर्शकों के हृदय को गहरे तक छू लिया।

अभिनेता एवं निर्देशक विजय जोरा के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक के जरिए आधुनिक भारतीय समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर किया गया, जिसमें माता-पिता का त्याग भुला दिया जाता है और बुढ़ापा बोझ बन जाता है।

एक बुजुर्ग पिता की आत्मकथा के कथानक पर आधारित इस नाटक ने मुख्य भूमिका प्रख्यात अभिनेता गौरव बलाना बहुत ही प्रभावपूर्ण निभाई। गौरव बलाना का भावपूर्ण एकल अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि दर्शक अंत तक सांस रोके बैठे रहे। विक्रम मोंगा और भव्य गुप्ता ने सहायक भूमिकाओं में गहराई दी, जबकि उमंग शर्मा के मंच-पार्श्व, संवेदनशील प्रकाश-व्यवस्था और पृष्ठभूमि संगीत ने पूरे मंचन को और अधिक मार्मिक बना दिया। निर्देशक विजय जोरा ने इस एकल नाटक को इतना शक्तिशाली बनाया कि यह केवल मंचन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश बन गया।

मुख्य अतिथि डॉ. जसप्रीत कोचर और श्रीमती मनजीत कोचर ने नाटक की प्रासंगिकता की खूब सराहना की। राष्ट्रीय कला मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने निर्देशक विजय जोरा, अभिनेता गौरव बलाना और समस्त कलाकारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे नाटकों को और अधिक मंच मिलने चाहिए, ताकि समाज में वास्तविक जागरूकता और बदलाव आ सके।

इस अवसर पर निर्देशक सहित सभी कलाकारों, सहयोगियों और मुख्य अतिथि का सम्मान किया गया।

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