इस्लामाबाद , अप्रैल 11 -- अमेरिका और ईरान के बीच "इस्लामाबाद वार्ता" शनिवार को शुरू हो गयी, जो 40 दिनों तक चले विनाशकारी संघर्ष के बाद घोषित दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम को स्थायी बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर शामिल हैं।

ईरान की ओर से 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग ले रहा है, जिसमें वार्ताकार, तकनीकी विशेषज्ञ और मीडिया प्रतिनिधि शामिल हैं। इस दल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ कर रहे हैं, जबकि विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इसमें शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी पक्ष 15 सूत्री प्रस्ताव लेकर आया है, जिसमें ईरान से परमाणु हथियार छोड़ने, उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार सौंपने, रक्षा क्षमताओं पर सीमाएं स्वीकार करने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने जैसी मांगें शामिल हैं।

इस बीच, वार्ता से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यदि बातचीत विफल होती है, तो अमेरिकी युद्धपोतों को फिर से हमले के लिए तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "हम जल्द ही जान जाएंगे कि वार्ता सफल होती है या नहीं," और संकेत दिया कि अमेरिका ने अपने सैन्य विकल्प खुले रखे हैं।

ईरान को अमेरिका पर गहरा अविश्वास है, विशेषकर विटकॉफ को लेकर, जिनकी अगुवाई में पूर्व वार्ताएं 2025 और इस वर्ष की शुरुआत में हमलों के कारण बाधित हो गई थीं।

वार्ता कई दिनों तक चलने की संभावना है और युद्धविराम को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं, खासकर लेबनान को लेकर, जिसे ईरान अपने प्रस्ताव का हिस्सा बताता है, जबकि अमेरिका इससे इनकार करता है।

वार्ता से एक दिन पहले ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर ईरानी रियाल में शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखकर अपनी रणनीतिक स्थिति स्पष्ट की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित