फ्लोरिडा , मई 02 -- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी नौसैनिक घेराबंदी न केवल एक सैन्य अभियान है, बल्कि इसके महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यावसायिक निहितार्थ भी हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग पर अमेरिका द्वारा सख्ती बढ़ाये जाने के बीच उन्होंने यह बयान दिया है।
इस घेराबंदी को वैश्विक ऊर्जा प्रवाह पर एक 'रणनीतिक लीवर' बताते हुए श्री ट्रंप ने होर्मुज में समुद्री यातायात के पैमाने पर जोर दिया, जहां से दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा रोजाना गुजरता है। उन्होंने टैंकरों और मालवाहक जहाजों की सघनता को एक ऐसा 'दबाव बिंदु' बताया, जिससे वाशिंगटन का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजारों पर काफी असर पड़ता है।
फ्लोरिडा में 'फोरम क्लब ऑफ द पाम बीचेस' में बोलते हुए श्री ट्रंप ने बड़े तेल टैंकरों से जुड़ी हालिया अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाइयों का उल्लेख किया और सुझाव दिया कि प्रवर्तन उपायों का कच्चे तेल की व्यावसायिक आवाजाही पर सीधा असर पड़ सकता है। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे एक टैंकर को चेतावनी देकर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया गया, जबकि एक अन्य को रोककर कब्जे में ले लिया गया और उसके कार्गो को जब्त कर लिया गया।
इन कार्रवाइयों को व्यावसायिक शब्दों में समझाते हुए उन्होंने कहा कि तेल की खेप को जब्त करना 'एक बहुत ही लाभदायक व्यवसाय' था। उन्होंने संकेत दिया कि समुद्री मार्गों पर नियंत्रण से आर्थिक लाभ और सीधा फायदा, दोनों मिल सकते हैं।
श्री ट्रंप ने कहा कि इस घेराबंदी का उद्देश्य तेहरान के तेल निर्यात और क्षेत्रीय प्रभाव पर अंकुश लगाना है। होर्मुज में किसी भी निरंतर व्यवधान से वैश्विक आपूर्ति कम होने की संभावना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और खाड़ी ऊर्जा प्रवाह पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं, विशेष रूप से प्रमुख एशियाई आयातक प्रभावित हो सकते हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देश अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जो इस घेराबंदी को उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक उच्च जोखिम वाला घटनाक्रम बनाता है।
श्री ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के प्रभुत्व को दोहराते हुए घेराबंदी को उन्नत निगरानी और हमले की क्षमताओं के साथ सख्ती से लागू बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी कम हो गई हैं, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है।
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