हैदराबाद , जनवरी 16 -- तेलंगाना में हैदराबाद सिटी पुलिस की साइबर अपराध इकाई ने 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आम लोगों के लिये परामर्श जारी किया है। इसमें अपराधी कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में , कूरियर कर्मचारियों या सरकारी अधिकारी बनकर पीड़ितों को डरा-धमकाकर धन स्थानांतरित करवाते हैं।
पुलिस ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि ऐसे धोखेबाज लोगों को गिरफ्तारी, उनके बैंक खाते बंद करने या कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हैं और उन्हें गलत तरीके से धनशोधन, तस्करी, नशीले पदार्थों या आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों से जोड़ते हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे घबराएं नहीं, व्यक्तिगत या बैंकिंग विवरण साझा करने से बचें और संदिग्ध फोन या संदेशों की तुरंत रिपोर्टिंग करें। गौरतलब है कि इस घोटाले में धोखे के कई स्तर शामिल हैं।
ऐसे धोखेबाज, पुलिसकर्मियों या सीबीआई, कस्टम, ईडी, ट्राई, डीओटी, एनआईए, एटीएस या कूरियर कंपनियों जैसी एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में पेश आते हैं और दावा करते हैं कि पीड़ित आपराधिक मामलों में शामिल है। पीड़ितों को घबराहट और जल्दबाजी पैदा करने के लिए तत्काल गिरफ्तारी और कानूनी परिणामों की धमकी दी जाती है। विश्वसनीय दिखने के लिए प्राथमिकी, गैर-जमानती वारंट और आरबीआई पत्रों सहित फर्जी दस्तावेज भी साझा किए जाते हैं।
ये धोखेबाज, पीड़ितों को गंभीर सजा और परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान की चेतावनी देकर डराते हैं। पीड़ितों पर संपत्ति बेचने का दबाव डाला जाता है, जिसमें धोखेबाज दावा करते हैं कि पैसा निर्दोषता के सबूत के तौर पर शीर्ष अदालत में जमा किया जा रहा है। उनसे 'सत्यापन', 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' जारी करने या गिरफ्तारी और दंड से बचने के बहाने धन भेजने की मांग की जाती है। धोखेबाज यह भी जोर देते हैं कि पीड़ित इस मामले को गोपनीय रखे और परिवार या दोस्तों को सूचित न करे।
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