हैदराबाद , मार्च 06 -- हैदराबाद के ग्लेन ईगल्स अस्पताल के डॉक्टरों ने हृदय उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों ने गंभीर 'ट्राइकसपिड रिगर्जिटेशन' और एडवांस्ड हार्ट फेलियर से जूझ रहे एक 75 वर्षीय मरीज पर दक्षिण भारत की पहली 'ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वॉल्व एज-टू-एज रिपेयर' (टी-टीईईआर) सफलतापूर्वक की।
हैदराबाद के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ एम साई सुधाकर के नेतृत्व में इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इसमें भारत में देश में विकसित टीईईआर डिवाइस 'मायक्लिप' का पहला प्रत्यारोपण शामिल है।
डॉ. सुधाकर ने शुक्रवार को हैदराबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ, थकान और शरीर में तरल पदार्थ जमा होने की समस्या थी। इससे उनका दैनिक जीवन काफी प्रभावित हो रहा था। विस्तृत मूल्यांकन के बाद, डॉक्टरों ने लीक हो रहे ट्राइकसपिड वॉल्व के इलाज के लिए कैथेटर-आधारित रिपेयर प्रक्रिया को चुना।
ट्राइकसपिड रिगर्जिटेशन तब होता है, जब हृदय के दाईं ओर का वॉल्व ठीक से बंद नहीं होता, जिससे रक्त पीछे की ओर बहने लगता है। इस स्थिति से पैरों और पेट में सूजन, थकान का बढ़ना और धीरे-धीरे हार्ट फेलियर हो सकता है।
इस न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया के माध्यम से डॉक्टरों ने पैर की नस के जरिये कैथेटर डाला और इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर उसे हृदय तक पहुंचाया। इसके बाद लीक हो रहे वॉल्व पर एक छोटा क्लिप डिवाइस लगाया गया, ताकि वह ठीक से बंद हो सके और रक्त के पीछे की ओर बहाव को कम किया जा सके।
डॉ. सुधाकर ने बताया कि यह शल्य क्रिया लगभग तीन सप्ताह पहले की गयी थी और तब से मरीज का स्वास्थ्य काफी बेहतर हो गया है और बिना सांस की तकलीफ के अपनी नियमित गतिविधियों पर लौट आया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस प्रक्रिया की लागत लगभग 15-18 लाख रुपये है, जिसका मुख्य कारण क्लिप डिवाइस की कीमत है। हालांकि, तकनीक का व्यापक उपयोग होने पर इसकी कीमतें कम होने की उम्मीद है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित