नयी दिल्ली , फरवरी 4 -- उच्चतम न्यायालय ने हैदराबाद की एक प्रमुख भूमि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजते हुए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया को मध्यस्थ नियुक्त किया है। साथ ही, अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने यह आदेश तेलंगाना उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया। ये याचिकाएं आर. रविंद्रनाथ बनाम ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एवं अन्य मामले से संबंधित हैं।
यह विवाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धी दावों से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता और उनकी बहनों के साथ एक निजी रियल एस्टेट डेवलपर मेसर्स ऑरेंज एवेन्यूज़ को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिकाएं दायर करने में हुई देरी को माफ करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह मामला परिवार के भीतर "लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई" का उदाहरण है। हालांकि पहले भी आपसी समझौते के प्रयास असफल रहे हैं, लेकिन पीठ ने टिप्पणी की कि मुकदमेबाजी जारी रहने से विवाद और लंबा खिंचता जाएगा।
न्यायालय ने कहा, "हम अब भी इस राय पर कायम हैं कि पक्षकारों को बैठकर बातचीत करनी चाहिए और एक न्यायसंगत समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा यह मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रहेगा।"पीठ ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया को पक्षकारों के बीच संवाद कराने और समाधान की संभावनाएं तलाशने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस और अन्य प्रक्रियात्मक पहलुओं को पक्षकारों के परामर्श से तय किया जाए और वे यथाशीघ्र मध्यस्थ से संपर्क करें।
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