जालंधर , फरवरी 12 -- फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर्स के एग्जीक्यूटिव सदस्य डॉ. नरेश पुरोहित ने गुरुवार को कहा कि भारत की मेडिकल टेक्नोलॉजी भले ही आगे बढ़ी हो, लेकिन हेल्थकेयर सिस्टम की नैतिक जिम्मेदारी में काफी गिरावट आयी है। उन्होंने कहा कि लोगों में यह भावना बढ़ रही है कि 'इलाज के मंदिर' कई मामलों में 'शोषण के बाज़ार' बन गये हैं।

एसोसिएशन ऑफ स्टडीज फॉर हेल्थकेयर के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, डॉ पुरोहित गुरुवार को अमृतसर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा आयोजित 'फाइट फॉर हेल्थ राइट्स' पर एक वेबिनार में बोल रहे थे। वेबिनार के बाद यहां एक रिलीज में डॉक्टर ने कहा कि हेल्थकेयर कोई कमोडिटी नहीं है, यह एक नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। भारत को सख्त कानूनों, बिना किसी समझौते के लागू करने और मेडिकल नैतिकता के साथ धोखा करने वालों के लिए कड़ी सजा की सख्त जरूरत है। देश को अपने हेल्थकेयर सिस्टम की आत्मा को वापस पाना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को लेकर चिंता बढ़ रही है, क्योंकि मेडिकल सेक्टर तेज़ी से एक कमर्शियल कंपनी जैसा होता जा रहा है, जो अक्सर लोगों का शोषण करती है। नतीजतन, आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए एडवांस इलाज तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने कहा, " इसलिए, सरकार को इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि सभी नागरिकों को उनकी फाइनेंशियल हालत चाहे जो भी हो, एडवांस मेडिकल सुविधाओं तक बराबर पहुंच मिले।"अपनी चिंता जताते हुए विशेषज्ञ ने कहा कि आज के हेल्थकेयर इकोसिस्टम की जगह बिलिंग ने ले ली है, और दया की जगह हिसाब-किताब ने ले ली है। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तेज़ी से कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह काम कर रहे हैं, जहां मरीजों को मुश्किल में फंसे इंसान के तौर पर नहीं बल्कि कमाई करने वाली यूनिट के तौर पर देखा जाता है। गैर-ज़रूरी डायग्नोस्टिक टेस्ट, बढ़े हुए बिल, सही देखभाल से मना करना और ज़बरदस्ती इलाज के तरीके परेशान करने वाले आम हो गये हैं।

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