शिमला , अप्रैल 01 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1971 में संशोधन करने को लेकर एक विधेयक पेश किया जिसका उद्देश्य विधायकों को दलबदल से हतोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि मौजूदा अधिनियम में विधानसभा सदस्यों के लिए भत्ते और पेंशन का प्रावधान तो है, लेकिन इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल को रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।

इस कानून को सदन के सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि यह संशोधन संवैधानिक जनादेश को बनाए रखने, मतदाताओं के फैसले की रक्षा करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को सुरक्षित रखने और संवैधानिक अनुचितता के खिलाफ एक निवारक (रोक) बनाने के लिए ज़रूरी हो गया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले विधानसभा के माध्यम से एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें यह कहा गया था कि यदि विधायक दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों के दायरे में आने वाले कार्यों में लिप्त पाए जाते हैं, तो उन्हें पेंशन और अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। इसे सर्वोपरि कानूनी प्रभाव देने और इसे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बनाने के लिए यह वर्तमान संशोधन विधेयक विधानसभा के समक्ष लाया गया है।

इस विधेयक पर गुरुवार को विधानसभा सत्र के अंतिम दिन सदन में चर्चा होने और इसे पारित किए जाने की संभावना है।

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