शिमला , अप्रैल 01 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने के उद्देश्य से बुधवार को विधानसभा में 'हिमाचल प्रदेश लिफ्ट (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया।
शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यह विधेयक सदन में पेश किया, जिस पर शुक्रवार को बजट सत्र के अंतिम दिन चर्चा और इसके पारित होने की संभावना है।
यह विधेयक राज्य में लिफ्ट, एस्केलेटर और ट्रैवलेटर के बढ़ते उपयोग को विनियमित करने के लिए लाया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2007 के मौजूदा अधिनियम के दायरे का विस्तार करना है, ताकि एस्केलेटर और ट्रैवलेटर को भी नियामक ढांचे में शामिल किया जा सके। राज्य के शहरी क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही सख्त प्रशासनिक नियंत्रण, अनिवार्य निरीक्षण और अनुपालन तंत्र के जरिए सार्वजनिक वसुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत लाइसेंस शुल्क में संशोधन, दंड का प्रावधान और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए थर्ड-पार्टी बीमा को अनिवार्य किया गया है।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि लिफ्ट, एस्केलेटर और ट्रैवलेटर लगाने से पहले सरकार की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके साथ ही क्षमता, गति और संरचनात्मक सुरक्षा मानकों जैसी विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नामित निरीक्षकों को परिसर में प्रवेश, जांच करने और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संचालन बंद करने या मरम्मत के आदेश देने का अधिकार दिया जाएगा। प्रस्तावित कानून के तहत वार्षिक निरीक्षण भी अनिवार्य किया गया है।
विधेयक में सख्त दंड का प्रावधान है, जिसमें बिना वैध लाइसेंस के संचालन पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में लगातार दंड और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी रखा गया है। इसके अलावा सुरक्षा में लापरवाही के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की स्थिति में ऑपरेटर और कंपनियों की जिम्मेदारी तय की गई है तथा यात्रियों के लिए बीमा कवरेज अनिवार्य किया गया है। साथ ही, इन उपकरणों की आयु 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसके बाद नए सिरे से लाइसेंस लेना होगा।
सरकार का यह कदम पहाड़ी शहरों और पर्यटन स्थलों में इन प्रणालियों की तेजी से बढ़ती स्थापना के बीच उठाया गया है, ताकि स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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