शिमला , मार्च 09 -- हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत चलाये गये व्यापक सत्यापन अभियान में बड़ी अनियमितताएं सामने आने के बाद पेंशन सूची से लगभग 1.28 लाख लाभार्थियों के नाम हटा दिये गये हैं। इस सत्यापन में मृत, अयोग्य और लापता लाभार्थियों के मामले सामने आये।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत सूचीबद्ध लगभग 44,000 लाभार्थी मृत पाये गये, फिर भी उनके बैंक खातों में पेंशन की राशि जमा की जा रही थी। इस खुलासे ने निगरानी तंत्र और कल्याणकारी योजनाओं में सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग पर चिंता बढ़ा दी है।

सत्यापन अभियान में मृत लाभार्थियों के अलावा करीब 6,000 लाभार्थी अयोग्य पाये गये हैं, जिनकी पेंशन अब बंद कर दी गयी है। वहीं विभाग ने पर्याप्त समय दिये जाने के बावजूद अनिवार्य सत्यापन प्रक्रिया पूरी न करने के कारण अन्य 47,000 पेंशन खाते बंद कर दिये हैं।

इसके अलावा करीब 30,000 लाभार्थियों का उनके पतों पर सुराग नहीं मिल सका या उनकी जानकारी सत्यापित नहीं हो पायी। इस कारण उनकी पेंशन सुविधाओं को निलंबित कर दिया गया है। इन कटौतियों से राज्य में कुल मिलाकर लगभग 1.28 लाख पेंशनभोगी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के दायरे से बाहर हो गये हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 तक हिमाचल प्रदेश में वृद्धावस्था सम्मान पेंशन, एकल नारी सम्मान योजना और दिव्यांग राहत भत्ता जैसी विभिन्न श्रेणियों के तहत लगभग 8.11 लाख लाभार्थी सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रहे थे। इसमें मासिक सहायता राशि 1,000 रुपये से 1,700 रुपये के बीच है।

अधिकारियों ने कहा कि पेंशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन अभियान शुरू किया गया था कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे।

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद मृतक और अयोग्य व्यक्तियों के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिये गये हैं, जबकि सत्यापन पूरा न करने वाले खाते भी बंद कर दिये गये हैं।

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