शिमला , फरवरी 12 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोलहवें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद किए जाने से उत्पन्न वित्तीय स्थिति पर विचार-विमर्श करने के लिए 13 फरवरी को हिमाचल प्रदेश सचिवालय में सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाई है।

उद्योग एवं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 'सामूहिक और एकजुट दृष्टिकोण' विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देशों पर यह बैठक बुलाई गई है।

अधिसूचना में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा आरडीजी वापस लेने से राज्य वित्तीय संकट में घिर गया है, जिससे राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी हितधारकों का एक साथ आना अनिवार्य हो गया है।

सरकार ने राज्य के सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों से अनुरोध किया है कि वे अपने 'बहुमूल्य सुझावों' के साथ बैठक में शामिल हों और राज्य के व्यापक हित में भविष्य की कार्रवाई तय करने में मदद करें। इस कदम को दलीय रेखाओं से ऊपर उठकर आम सहमति बनाने और केंद्र के समक्ष एक एकजुट पक्ष प्रस्तुत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान बंद करने की सिफारिश के बाद यह मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। सीमित आंतरिक राजस्व स्रोतों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में वेतन, पेंशन तथा बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर होने वाले उच्च व्यय के कारण हिमाचल प्रदेश राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच के वार्षिक अंतर को पाटने के लिए आरडीजी सहायता पर निर्भर रहा है।

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