शिमला , फरवरी 13 -- केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के सिग्नल की खराब गुणवत्ता और बार-बार 'वॉयस कॉल' कटने की चिंताओं पर संसद को आश्वासन दिया है कि राज्य में दूरसंचार बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा दूरसंचार घनत्व को बढ़ाने के लिए ठोस उपाय किये जा रहे हैं।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि सरकार ने केबल फॉल्ट, मरम्मत की समय सीमा और बेस ट्रांससीवर स्टेशन (बीटीएस) अपटाइम सहित परिचालन और वित्तीय मानकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बीएसएनएल सर्किलों की मासिक और त्रैमासिक प्रदर्शन समीक्षा शुरू की है। उन्होंने कहा, "लक्ष्य कम से कम 95 प्रतिशत अपटाइम सुनिश्चित करना है। साथ ही जहां आवश्यक हो वहां और कर्मियों की फिर से तैनाती की जाएगी।"गौरतलब है कि बीटीएस वह उपकरण/स्टेशन होता है जो मोबाइल फोन और मोबाइल नेटवर्क के बीच वायरलेस सिग्नल के जरिए संचार स्थापित करता है। बीटीएस अपटाइम का मतलब है कि बीटीए दिन के कितने समय सुचारू रूप से काम करता है।
प्रश्नकाल के दौरान शिमला के सांसद सुरेश कश्यप ने बीएसएनएल में कर्मचारियों की भारी कमी और राज्य के दूरदराज तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार नेटवर्क असफल होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई गांव अभी भी बुनियादी 2जी संपर्क के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि निवासियों को भारी बर्फबारी और बारिश के दौरान बार-बार 'कॉल ड्रॉप' और लंबी सेवा कटौती का सामना करना पड़ता है।
श्री कश्यप ने सदन को सूचित किया कि सीनियर सब-डिवीजनल इंजीनियरों (एसडीई) के 192 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 81 कार्यरत हैं। इसी तरह, 282 पदों के मुकाबले केवल 165 जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर (जेटीओ) और 177 स्वीकृत पदों के मुकाबले 110 जूनियर इंजीनियर (जेई) काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी कठिन इलाकों में सेवाओं के समय पर रखरखाव और बहाली में बाधा डालती है।
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