शिमला , दिसंबर 15 -- हिमाचल प्रदेश की फोरेंसिक विभाग को इस वर्ष एक जनवरी से 30 नवंबर के बीच फोरेंसिक जांच के लिए 12,209 मामले प्राप्त हुए और उसने अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 12,120 फोरेंसिक रिपोर्ट जारी कीं।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय (डीएफएस) की सोमवार को सरहाना की है।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि बद्दी, बिलासपुर और नूरपुर स्थित जिला फोरेंसिक इकाइयों ने 234 अपराध स्थलों का दौरा किया और साक्ष्यों पर कार्रवाई की, जिससे प्रमुख जाँचों में महत्वपूर्ण सुराग मिले।

श्री ठाकुर ने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञों ने 526 अपराध स्थल परीक्षण भी किए, जिससे पुलिस और अन्य एजेंसियों को जांच में काफी मदद मिली। वह शिमला के मॉल रोड पर स्थित ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर हॉल में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई थी, जिसमें फोरेंसिक के माध्यम से सुलझाए गए विभिन्न जघन्य अपराध मामलों को प्रदर्शित किया गया था। इस प्रदर्शनी को आम जनता से लेकर विभिन्न हितधारकों से काफी सहायता मिली।

गौरतलब है कि नए कानून के तहत, सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक विशेषज्ञों का अपराध स्थल का दौरा करना अनिवार्य है, जिससे जाँचों को वैज्ञानिक समर्थन काफी मजबूत हुआ है।

फोरेंसिक सेवा निदेशक मीनाक्षी महाजन ने अपने भाषण में डीएफएस की प्रमुख उपलब्धियों, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने आपराधिक न्याय प्रणाली में निष्पक्षता, सटीकता और दक्षता सुनिश्चित करने में वैज्ञानिक साक्ष्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

सुश्री महाजन ने डीएफएस की विरासत पर विचार करते हुए बताया कि 13 दिसंबर, 1988 को राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएसएल) की स्थापना के बाद से इसकी यात्रा शुरू हुई। उन्होंने कहा कि विभाग ने शुरुआत में पुलिस, सतर्कता और अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सेवा प्रदान करते हुए धीरे-धीरे न्यायपालिका, बैंकों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी विभागों तक अपनी विशेषज्ञता का विस्तार किया।

इस अवसर पर, शिक्षा मंत्री ने फोरेंसिक विशेषज्ञों और अन्य अधिकारियों के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हुए पुरस्कार प्रदान किए। प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए हिमाचल फोरेंसिक मेडल और मेधावी सेवाओं के लिए हिमाचल फोरेंसिक मेडल श्री नसिब सिंह पटियाल और डॉ. अजय सिंह राणा को प्रदान किए गए। डॉ. अश्विनी भारद्वाज को ' गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन प्रणाली पुरस्कार', डॉ. नरेश शर्मा को ' अपराधस्थल प्रबंधन पुरस्कार' और श्री कपिल शर्मा को प्रयोगशाला में 'प्रयोगशाला में अपराध स्थल विश्लेषण ' के लिए सम्मानित किया गया।

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