शिमला , दिसंबर 10 -- हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थिति ऐतिहासिक 'राजभवन' को अब 'लोक भवन' के नाम से जाना जाएगा। इसकी स्थापना औपनिवेशिक काल में हुई थी और यहां भारत-पाकिस्तान के बीच प्रसिद्ध शिमला समझौता हुआ था।

राज्यपाल सचिवालय ने मंगलवार को औपचारिक अधिसूचना जारी कर नए नाम को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की।

यह बदलाव केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद किया गया है, जिसमें प्रमुख संस्थानों के नाम को प्राधिकार भाव की बजाय सेवा भाव से जोड़ने का अभियान चलाया गया है। यह नामकरण एक व्यापक राष्ट्रीय बदलाव के अनुरूप है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर 'सेवा तीर्थ' कर दिया है जो सरकार द्वारा सत्ता के प्रतीकात्मक महत्व से निर्णायक रूप से दूर हटने का एक मुख्य संकेत देता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश में राजभवनों एवं राजनिवासों का नाम बदलने की घोषणा करते हुए कहा कि यह परिवर्तन "विकसित एवं बेहतर भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर" है।

शिमला के लिए, यह बदलाव भव्य ब्रिटिश युग की इमारत के द्वार पर लगी एक नई नामपट्टिका से कहीं अधिक है। यह राज भवन की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने की एक कोशिश है, एक विशिष्ट सत्ता के प्रतीक से हटकर एक ऐसे स्थान के रूप में जो जनहित शासन के विचार को मूर्त रूप प्रदान करता है।

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