नैनीताल , अप्रैल 16 -- हल्द्वानी दंगा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को गुरुवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने तीनों मामलों में आरोपी को जमानत प्रदान कर दी है।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा दंगा मामले में आरोपी के खिलाफ तीन पृथक-पृथक मामले दर्ज हैं। आरोपी के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। वह पिछले दो साल से जेल में बंद है। हल्द्वानी की सत्र अदालत ने 06 फरवरी, 2025 को आरोपी के जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था।
इसके बाद आरोपी की ओर से सत्र अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर जमानत की मांग की गयी। तीनों अपीलों पर आज न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में एक साथ सुनवाई हुई।
आरोपी की ओर से कहा गया कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। वह घटना के दिन मौके पर मौजूद नहीं था। आरोपी दो साल से अधिक समय से जेल में बंद है। जांच टीम की ओर आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। ऐसे में सुबूतों के खिलाफ छेड़छाड़ की संभावना भी नहीं है। यही नहीं सभी सह आरोपियों को भी जमानत मिल चुकी है।
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी मुख्य साजिशकर्ता है और वह जानबूझकर घटना के दिन बाहर चला गया था। घटना से पहले 30 जनवरी 2024 को आरोपी के घर पर साजिशन बैठक की गई।
आरोपी के अधिवक्ता विकास गुगलानी और मनप्रीत सिंह अजमानी ने बताया किअंत में खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को तीनों मामलों में शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी है।
आरोपी समय समय पर शेषन कोर्ट में पेश होता रहेगा। सुबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल आठ फरवरी को बनभूलपुरा में मलिक के बगीचे में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाये जाने के दौरान दंगा भड़क गया था और भीड़ ने पुलिस और प्रशासन की टीम पर पथराव के साथ ही हमला कर दिया था।
बनभूलपुरा थाने को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी जबकि सौ से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने 100 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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