पटना , दिसंबर 11 -- बिहार जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने गुरूवार को कहा कि सात निश्चय-2 के अंतर्गत संचालित 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' कार्यक्रम राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है और इसके क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
श्री मल्ल की अध्यक्षता में आज 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' कार्यक्रम के अंतर्गत योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि कुछ योजनाओं में कार्य की गति अपेक्षित स्तर से कम है।
प्रधान सचिव श्री मल्ल ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में वर्क प्रोग्राम के अनुसार निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 20 प्रतिशत से कम काम हुआ है, उन सभी मामलों में संबंधित कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक से स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-2 के अंतर्गत संचालित 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' कार्यक्रम राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना, हर खेत तक जल उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान कर कृषि उत्पादन को मजबूती देना है।उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि योजना क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधान सचिव श्री मल्ल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं की कार्य-गति बढ़ाई जाए, तथा मानव-बल, सामग्री और मशीनरी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रगति में बाधा उत्पन्न करने वाले सभी कारणों को तत्काल दूर किया जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता का विस्तार समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के तहत चयनित 1203 योजनाओं में से अब तक कुल 1179 योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं, जिनसे 3129.41 हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता सृजित तथा 6,38,24.52 हेक्टेयर. क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन किया गया है। संयुक्त तकनीकी सर्वेक्षण के प्रथम चरण में कुल 429 योजनाएँ निर्धारित थीं, जिनमें से 422 पूर्ण हुई हैं।द्वितीय चरण की 332 योजनाओं में से 330 पूर्ण हुई है, तृतीय चरण की 442 योजनाओं में से 427 पूर्ण हो चुकी हैं।
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