नयी दिल्ली , दिसंबर 12 -- राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश ने भारत और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि को उल्लेखनीय बताते हुए भू-राजनीतिक बदलावों के इस दौर में द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार दिये जाने पर बल दिया है।
श्री हरिवंश ने चेक गणराज्य के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल से शुक्रवार को यहां बातचीत में यह बात कही। यह दल संसद भवन परिसर में आया था। उन्होंने बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा क्षेत्र में नियमित रूप से बातचीत होती रही है। पिछले साल जनवरी में, चेक प्रधानमंत्री पेट्र फियाला ने भारत का दौरा किया, जिसके दौरान नवाचार पर रणनीतिक साझेदारी को अपनाया गया। श्री हरिवंश ने कहा कि इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों को नई तेज़ी मिली।
राज्य सभा के उप सभापति ने व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में उजागर करते हुए संतोष व्यक्त किया कि भारत-चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, दोनों पक्षों को व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए सहयोग करना चाहिए। 2024 में चेक गणराज्य के साथ द्विपक्षीय व्यापार 4.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात 3 अरब डालर के स्तर का रहा। इस दौरान चेक गणराज्य को भारत से स्मार्टफोन, फार्मा उत्पाद, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, कपड़े, जूते और अन्य वस्तुएं का निर्यात हुआ।
राज्य सभा सचिवालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार श्री हरिवंश ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि भारत-चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
चेक गणराज्य की संसद के सीनेट के उपसभापति डॉ. जित्का सेटलोवा के नेतृत्व में इस संसदीय प्रतिनिधिमंडल की श्री हरिवंश के साथ बैठक में द्विपक्षीय सांस्कृतिक संबंध, व्यापार, रक्षा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती भागीदारी पर चर्चा की गयी।
श्री हरिवंश ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की वर्ष 1921 और 1926 की वहां की यात्राओं को दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और बौद्धिक जुड़ाव की सुदृढ़ नींव रखने वाला बताया। उनकी विरासत को याद रखने के लिए वर्ष 2004 में प्राग में टैगोर की एक आवक्ष मूर्ति लगाई गई और एक सड़क का नाम 'ठाकुरोवा' रखा गया। वहां चार्ल्स यूनिवर्सिटी में भारत- विद्या (इंडोलॉजी) विभाग की स्थापना किए जाने से संस्कृति, भाषाओं और साहित्य में हमारी साझी रुचि झलकती है, जो वर्तमान पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।
चेक गणराज्य के डिजिटल नोमैड कार्यक्रम में भारत को शामिल किये जाने पर आभार व्यक्त करते हुए, उप सभापति ने कहा कि यह प्रतिभा गतिशीलता, नवाचार और सहयोग के लिए नए अवसर खोलता है। इससे लोगों के बीच आपसी संबंध और भी अधिक मजबूत होंगे।
इस अवसर पर राज्य सभा सदस्य महुआ माजी, रामचंद्र जांगड़ा और सुमित्रा बाल्मीक तथा राज्य सभा के महासचिव, पी. सी. मोदी भी उपस्थित थे।
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