चंडीगढ़ , मार्च 25 -- हरियाणा में गत 16 मार्च को राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव की मतगणना के दौरान काउंटिंग एजेंटों की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने 16 मार्च की रात ही मतगणना के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को ईमेल भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। हालांकि, उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मंगलवार को फिर से संदेश भेजकर शीघ्र कार्रवाई की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध निर्वाचित घोषित हुए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल मामूली अंतर से चुनाव हार गए।
श्री कुमार के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा 09 मई 2014 को जारी निर्देशों के मुताबिक, किसी भी चुनाव में राज्य सरकार के मौजूदा मंत्री और विधायक काउंटिंग एजेंट नहीं बन सकते। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री सांसद शहरी निकायों के अध्यक्ष जिला परिषद एवं पंचायत समिति के चेयरमैन सहकारी समितियों के निर्वाचित अध्यक्ष सार्वजनिक उपक्रमों के चेयरमैन सरकारी वकील और कोई भी सरकारी कर्मचारी भी काउंटिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद आरोप है कि राज्यसभा चुनाव में प्रमुख उम्मीदवारों भाजपा के संजय भाटिया कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल ने अपने काउंटिंग एजेंट के रूप में मौजूदा मंत्री और विधायकों की नियुक्ति की जो चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन माना जा रहा है।
श्री कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और आयुक्तों हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी और संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को भेजे रिमाइंडर में इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है ताकि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित