चंडीगढ़ , दिसंबर 29 -- हरियाणा में लंबे समय से लंबित भूमि बंटवारा मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त (एफसीआर) डॉ. सुमिता मिश्रा ने व्यापक और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों में देरी से प्रभावित हजारों नागरिकों को समयबद्ध राहत प्रदान करना है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि भूमि बंटवारा मामलों का निपटारा राजस्व अधिकारियों की प्रमुख वैधानिक जिम्मेदारी है। नए निर्देशों के तहत प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह कम से कम 12 बंटवारा मामलों का निपटारा करना अनिवार्य होगा।

वहीं, कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को अधिक लंबित मामलों वाले क्षेत्रों में तैनात कर प्रति माह न्यूनतम 20 मामलों के निपटारे का लक्ष्य दिया गया है। इन लक्ष्यों की निगरानी के लिए उप आयुक्त, मंडल आयुक्त और वित्त आयुक्त स्तर पर मासिक समीक्षा की जाएगी।

मुकदमेबाजी कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र लागू किया गया है। इसके तहत सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों की सेवाएं लेकर गांव स्तर पर एडीआर शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां आपसी सहमति से बंटवारा मामलों का समाधान कराया जाएगा। प्रत्येक सफल निपटारे पर 10 हजार रुपये का मानदेय निर्धारित किया गया है, जिसे विवादित पक्ष साझा रूप से वहन करेंगे।

संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रीडर की नियुक्ति, स्वतंत्र राजस्व न्यायालयों की स्थापना और नियमित रूप से न्यायालय लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों के प्रदर्शन की त्रैमासिक समीक्षा की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन और लक्ष्य पूरा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. मिश्रा ने प्रतिस्थापित धारा 111ए के तत्काल क्रियान्वयन के भी निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया कि सभी आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य राजस्व न्याय प्रणाली में विश्वास बहाल करना है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित