चंडीगढ़ , अप्रैल 20 -- हरियाणा में होने वाले नगर निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर सवाल खड़े हो गये हैं, एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ने पत्रकारों को जानकारीदेते हुए कहा कि हरियाणा के दोनों म्युनिसिपल कानूनों और उनके तहत बने निर्वाचन नियमों में पार्टी सिंबलपर चुनाव कराने का कोई उल्लेख नहीं है।
राज्य निर्वाचन आयोग तीन नगर निगमों अंबाला, पंचकूला और सोनीपत, रेवाड़ी नगरपालिका परिषद, उकलाना, सांपला और धारूहेड़ा नगरपालिका समितियों और छह अन्य निकायों के एक-एक वार्ड में उपचुनाव करा रहा है। नामांकन 21 से 25 अप्रैल तक, मतदान 10 मई और मतगणना 13 मई को होगी। भाजपा, कांग्रेस, आप, इनेलो और जजपा पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
एडवोकेट हेमंत ने बताया कि हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973 और हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 और इनसे जुड़े निर्वाचन नियमों में पार्टी सिंबल का प्रावधान नहीं है। आयोग ने अप्रैल 2022 में कानून में संशोधन का प्रस्ताव भेजा था, जिसे प्रदेश सरकार ने नामंजूर कर दिया था। दिसंबर 2024 में पारित नए हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 में भी दल-बदल विरोधी या राजनीतिक दल संबंधी प्रावधान नहीं जोड़ा गया।
हेमंत ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून के बिना पार्टी सिंबल पर चुनाव शहरी मतदाताओं के साथ मजाक है। संविधान की दसवीं अनुसूची का दल-बदल कानून केवल संसद-विधानसभा पर लागू होता है, निकायों पर नहीं। यही वजह है कि सोनीपत के पूर्व कांग्रेस महापोर निखिल मदान और अंबाला की पूर्व मेयर शक्ति रानी शर्मा पार्टी बदलकर भाजपा में आ गये और विधायक बन गये। कई पार्षद भी पाला बदल चुके हैं।
हिमाचल प्रदेश ने मार्च 2021 में कानून संशोधन कर निकाय चुनाव में पार्टी सिंबल और दल-बदल विरोधी प्रावधान जोड़े थे। हरियाणा को भी इसी तर्ज पर कानून बदलना होगा, वरना केवल आयोग के आदेश से पार्टी सिंबल आबंटन पर कानूनी सवाल उठते रहेंगे।
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