नैनीताल , मार्च 25 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिले के जगजीतपुर, चमरिया के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चक रोड, ग्राम समाज की भूमि और सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

चमरिया निवासी पूर्व सैनिक हरीश चंद्र जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हरिद्वार जिले के कई गांवों में वर्षों से चक रोड, पैदल रास्तों, नहरों और जल स्रोतों पर अवैध कब्जे किये गये हैं, जिससे ग्रामीणों और किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि सभी चक रोड, ग्राम समाज भूमि और जल स्रोतों की पहचान कर उनका सीमांकन और पुनर्स्थापन कराया जाए, सार्वजनिक रास्तों और नहरों से अवैध कब्जे हटाए जाएं। अतिक्रमण वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के नए निर्माण, रजिस्ट्री या बदलाव पर रोक लगाई जाए।

यह भी मांग की कि राज्य सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करे, जिससे अतिक्रमण की समय रहते पहचान और रोकथाम हो सके।

संयुक्त निरीक्षण के साथ ही नक्शों का डिजिटाइजेशन और सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाए। याचिका में विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति, सीमांत किसानों और ग्रामीण समुदायों के हितों की रक्षा के लिए विशेष उपाय करने तथा जिला स्तर पर निगरानी समिति गठित करने की मांग की है।

मामले को सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराने और प्रशासन को उस पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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