चंडीगढ़ , फरवरी 02 -- भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल, भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के अध्यक्ष हरिंदर सिंह लखोवाल, भारतीय किसान यूनियन (पंजाब) के महासचिव हरजिंदर सिंह और परमिंदर सिंह चालकी ने सोमवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पंजाब के जल में यूरेनियम, सीसा, फ्लोराइड, आर्सेनिक, भारी धातुएं और नाइट्रेट भारी मात्रा में मिल गये हैं।
इसके कारण पंजाब में कैंसर बड़े पैमाने पर फैल गया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों के अनुसार, यदि तत्काल कदम नहीं उठाये गये तो चार वर्षों के भीतर पंजाब के हर घर में कैंसर और पीलिया जैसी बीमारियां आम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि 2025 में केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री ने संसद में कहा था कि पंजाब कैंसर का घर बन गया है।
श्री राजेवाल ने कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इस समस्या की गंभीरता को जरा भी नहीं समझा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने असंवैधानिक समझौतों के माध्यम से पंजाब से हमारी नदियों का पानी छीन लिया है और इसे जबरन गैर-रायपेरियन राज्यों को दे दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा ने कभी भी कोई जल समझौता पारित नहीं किया। समय-समय पर पंजाब के नेताओं और मुख्यमंत्रियों द्वारा जबरन समझौते किये गये। वर्तमानमें, पंजाब का भूमिगत जल बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है और तीसरी परत का पानी न तो पीने योग्य है और न ही फसल उगाने के लिए उपयुक्त है। इसलिए, हमारे पास अपना पानी वापस पाने के लिए आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के खिलाफ कई संवैधानिक उल्लंघन किये गये हैं, इसलिए हमें संवैधानिक न्याय पाने के लिए संघर्ष करना होगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब में बाढ़ से 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बाढ़ के बाद बची हुई धान की फसल की पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ कमहो गयी। इसके बाद, गेहूं की फसल की पैदावार भी आठ से 10 क्विंटल प्रति एकड़ कम हो गयी। मक्के की फसल की पैदावार 15 से 20 क्विंटल कम हो गयी। वर्तमान में, गन्ने की पैदावार 100 से 150 क्विंटल प्रति एकड़ कम हो रही है और आलू की मौजूदा फसल की कोई कीमत नहीं है। किसान बर्बाद हो रहे हैं। नेताओं के एजेंडे में इसकी कोई परवाह नहीं है। इस प्रकार, पंजाब के लोग तेजी से एक और बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं।
इस अवसर पर हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि आज पंजाब को ऐसी कृषि बीमा योजना की आवश्यकता है जिसमें प्रत्येक एकड़ को एक इकाई माना जाये और किसानों को मुआवजा दिया जाये।
इस अवसर पर सभी नेताओं ने घोषणा की कि पंजाब के जल, किसानों के ऋण माफी, एमएसपी और अन्य मांगों के लिए जन आंदोलन हेतु जल्द ही एक समन्वय अभियान शुरू किया जाएगा। इससे पहले, छह फरवरी को किसान संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान अमृतसर के श्री दरबार साहिब में एकत्रित होंगे और प्रार्थना करेंगे। इसके बाद, समन्वय अभियान जनता को एक बड़े संघर्ष के लिए तैयार करेगा। उन्होंने सभी किसान संगठनों से छह फरवरी को अरदास के दौरान श्री दरबार साहिब में एकत्रित होने की अपील की। अरदास के बाद समन्वय अभियान शुरू करने और अन्य मांगों के विस्तार कीघोषणाकी जाएगी।
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