तेहरान , अप्रैल 10 -- ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने शुक्रवार को अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि उनका देश ऐसे किसी भी संघर्षविराम को स्वीकार नहीं करेगा, जिसका उपयोग अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित करने और नयी आक्रामकता की तैयारी के लिए करे।

ईरान के सरकारी सूचना पोर्टल के अनुसार, तख्त-रवांची ने स्पष्ट किया कि वार्ता की शर्तों से ईरान की क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ समझौता नहीं होना चाहिए।

दूसरी ओर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच आगामी वार्ताओं को 'दुनिया का सबसे शक्तिशाली रिसेट' करार दिया है। ईरान का हालांकि कहना है कि किसी भी शांति वार्ता का आधार ईरान की '10-सूत्री योजना' ही होगी। ईरान के उप विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों ने अमेरिका और इजरायल को ईरान के प्रति अपने रणनीतिक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

इस बीच, अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली वार्ताओं से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जतायी है। यह वार्ता शनिवार सुबह शुरू होने वाली है। गौरतलब है कि मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय संघर्षविराम की घोषणा की थी, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जतायी थी।

संघर्षविराम के बीच हालांकि इजरायल के लेबनान और दूसरे क्षेत्रों में जारी हवाई हमलों ने तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि ये हमले हिजबुल्लाह के कारण समझौते का हिस्सा नहीं हैं, जबकि ईरान इन्हें संघर्षविराम का उल्लंघन मान रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने जोर दिया है कि संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए सभी मोर्चों पर संघर्षविराम की शर्तों का पूर्ण पालन अनिवार्य है।

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