श्रीगंगानगर, अप्रैल 09 -- राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी विकास परियोजना के लिए 325 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी।

यह परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

सलाहकार एजेंसी नेपकोन की टीम घग्घर क्षेत्र की संभावनाओं को तलाशने के लिए गांव-गांव पहुंच रही है। टीम ने आज गंगागढ़ गांव का दौरा किया, जहां स्थानीय ग्रामीणों से सुझाव लिए गए। प्रशासक नवनीत संधू के नेतृत्व में हुई इस बैठक में ग्रामीणों ने नाली बेड का सीमांकन कराने और अवैध कब्जे हटाने की मांग जोर-शोर से रखी।

ग्रामीणों की मांगों को देखते हुए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने तुरंत सीमांकन कार्रवाई के निर्देश दे दिए। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

पहले चरण में नदी की साइड लाइनिंग को पक्का बनाया जाएगा। इससे नदी किनारे की मिट्टी का कटाव रुकेगा और क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ेगी। साथ ही बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा। दूसरे चरण में क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से आकर्षक बनाने के लिए लाइटिंग, नाव संचालन, वॉक-वे, गार्डन, सौंदर्यीकरण और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे घग्घर नदी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

प्रशासक नवनीत संधू ने गंगागढ़ बैठक में कहा-घग्घर रिवर फ्रंट केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का माध्यम बनेगा। ग्रामीणों के सुझावों को डीपीआर में शामिल किया जाएगा ताकि परियोजना उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप बने।नेपकोन की टीम जल्द ही अन्य गांवों का भी दौरा करेगी और क्षेत्र की भौगोलिक, पर्यावरणीय तथा पर्यटन संभावनाओं का पूरा आकलन करेगी। डीपीआर तैयार होने के बाद कार्य की समय सीमा और विस्तृत लागत का खुलासा किया जाएगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित