हजारीबाग , अप्रैल 08 -- झारखंड में सरकारी वित्तीय व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।

हज़ारीबाग़ ट्रेज़री से 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह गड़बड़ी लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी, जिसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की आशंका है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, फर्जी बिल, गलत दस्तावेज़ और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर यह रकम निकाली गई। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी निकासी लंबे समय तक बिना किसी शक के जारी रही। मामला तब उजागर हुआ जब वित्तीय ऑडिट में संदिग्ध लेन-देन सामने आए।

जांच के दायरे में कई कर्मचारी और अधिकारी आ गए हैं। दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि अंदरूनी सहयोग के बिना इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं थी।

इधर, बोकारो जिले में भी 4.29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि यह सिर्फ एक जिले तक सीमित मामला नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर फैले किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर सकता है।

सरकार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। साथ ही, ट्रेज़री सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधारों की भी योजना बनाई जा रही है।

इस खुलासे के बाद आम जनता में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह राशि विकास कार्यों के लिए निर्धारित होती है। अब सभी की नजर जांच के परिणाम और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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