चंडीगढ़ , मार्च 16 -- भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। इसी क्रम में स्वीडन के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंचकूला स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) का दौरा कर आयुर्वेद उपचार पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
संस्थान पहुंचने पर उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस) डॉ. गौरव गर्ग ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और उन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों से अवगत कराया। वहीं, डीन इंचार्ज प्रो. सतीश गंधर्व ने संस्थान की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान में किए जा रहे उपचार और व्यवस्थाओं की सराहना की।
डॉ. गौरव गर्ग ने बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में संस्थान के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रो. गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जा रहा है। संस्थान की 12 ओपीडी में प्रतिदिन करीब 400 से 500 मरीज परामर्श और इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार किया जाता है।
चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिन्षा ने प्रतिनिधिमंडल को संस्थान का भ्रमण कराया और ओपीडी व आईपीडी सेवाओं की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने पंचकर्म, केंद्रीय प्रयोगशाला, फिजियोथैरेपी, फार्मेसी, पंजीकरण शाखा और ऑपरेशन थियेटर का भी निरीक्षण किया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं गबिजा गाडलियाउस्काइट और रीता जिलेनाइते ने कहा कि यूरोपीय देशों में आयुर्वेद उपचार की मांग तेजी से बढ़ रही है और लोगों का विश्वास इस पद्धति पर मजबूत हो रहा है। उन्होंने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में अलग पहचान बना रहा है।
इंडो-बाल्टिक सोसायटी फॉर कॉन्शियसनेस, लिथुआनिया के को-ऑर्डिनेटर स्वामी आदित्य के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल भारत भ्रमण पर है, जो विभिन्न राज्यों में पर्यटन स्थलों के साथ शैक्षणिक और आयुर्वेद से जुड़े संस्थानों का दौरा कर रहा है। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र, डॉ. विवेक गुप्ता (रायपुर रानी) और रिचा भार्गव भी उपस्थित रहीं।
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