लखनऊ , फरवरी 17 -- समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उपमुख्यमंत्री व चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री का नाम लिए बगैर सोशल मीडिया के माध्यम से तंज कसा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को ये समझ लेना चाहिए कि वो ख़ुद और उनका विभाग 'हाता नहीं भाता' की मुख्य-नीति के विस्तार के कारण, उन्हीं की तरह उपेक्षित है और अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उनसे विभाग छीनने का आधार बनाया जा रहा है।
मंगलवार को अखिलेश यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की ऐसी दुर्गति देखकर हर कोई, ये सहज रूप से स्वीकार भी कर लेगा कि सच में स्वास्थ्य मंत्री की लापरवाही और कमीशनख़ोरी की वजह से प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की इतनी दुर्दशा हुई है जबकि सच ये है कि उन बेचारों के हाथ में पैसों के हिस्से बाँट के अलावा और कुछ अधिकार या दूसरी शक्ति, सामर्थ्य और अख़्तियार नहीं है। स्वास्थ्य-चिकित्सा विभाग में वो नेम प्लेट पर ही मंत्री हैं, कोई उनकी सुनता भी नहीं है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सुना है उन्होंने अपने मोबाइल में एक रिमाइंडर लगा रखा है, जो रोज़ सुबह उन्हें याद दिलाता है कि वो स्वास्थ्य मंत्री हैं। जानेवालों के बारे में अब और क्या कहा जाए, उनका 'हाता से जो पुराना नाता है', शायद उसी की वजह से उनका खाता बंद हो रहा है।
श्री यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी सरकार के समय बनाए गए मेडिकल कॉलेज, कैंसर इंस्टीट्यूट और अन्य अस्पतालों की भाजपा सरकार द्वारा जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपाइयों ने अपने समय में बने मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंग खड़ी करने में केवल कमीशन खाया है लेकिन उन्हें चलाया नहीं है। मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर बिना स्टॉफ़ के खड़े हैं। उन्होंने कहा कि भाजपाइयों ने अपने कार्यालय, और मुख्य भाजपाई ने अपनी आयुष यूनिवर्सिटी तो खोल ली है परंतु जनहित में काम करनेवाले आम अस्पतालों की पूरी तरह उपेक्षा की है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित