नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा को समर्पित राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित 27वां स्वामी हरिदास तानसेन संगीत-नृत्य महोत्सव रविवार शाम भावपूर्ण प्रस्तुतियों के साथ भव्य रूप से संपन्न हो गया। तीन दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित आयोजन ने राग, रस और गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत झलक पेश की।
महोत्सव समापन संध्या की शुरुआत कथक प्रस्तुति से हुई, जिसका नेतृत्व पद्म भूषण डॉ. उमा शर्मा और उनके शिष्यों ने किया। 'मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो' जैसे कालजयी सूरदास पद पर आधारित भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से डॉ. उमा शर्मा ने यह स्पष्ट किया कि कथक में भाव ही आत्मा है। अपने गुरु पं. शंभू महाराज की परंपरा को निभाते हुए उन्होंने तकनीक और संवेदना का अद्भुत संतुलन प्रस्तुत किया। 84 वर्ष की आयु में भी डॉ. उमा शर्मा की मंचीय उपस्थिति और ऊर्जा दर्शकों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रही।
इसके बाद संतूर वादक पं. राहुल शिवकुमार शर्मा की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने पिता, संतूर सम्राट पं. शिवकुमार शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने रागों की मधुर यात्रा कराई। उनकी वादन शैली में संतूर की कोमलता, लयात्मक स्पष्टता और ध्यानात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।महोत्सव का समापन सुप्रसिद्ध गायिका बेगम परवीन सुल्ताना की सशक्त और भावप्रवण गायकी के साथ हुआ। खयाल गायन में अपनी अद्वितीय पकड़ के लिए जानी जाने वाली परवीन सुल्ताना ने जटिल तानों और विस्तारपूर्ण रागों के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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