नयी दिल्ली , दिसंबर 16 -- आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालिवाल ने उनके साथ हुई हिंसा का मुद्दा मंगलवार को सदन में उठाने की कोशिश की, लेकिन उपसभापति हरिवंश ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।

चुनाव सुधारों पर सदन में चर्चा के दौरान श्रीमती मालीवाल ने कहा, "विश्व भर में जो भी महिलाएं राजनीति में आती हैं उनकी जिंदगी में बहुत सी चुनौतियां आती हैं। इंटर पार्लियामेंट्री यूनियन और यूएन वीमिन की रिपोर्ट के अनुसार 80 प्रतिशत महिला सांसदों को मानसिक उत्पीड़न का समाना करना पड़ता है। पचास प्रतिशत को बलात्कार और जान से मारने की धमकी मिलती है। पच्चीस प्रतिशत को शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है। यह एक वैश्विक मुद्दा है और मैंने इसे बहुत करीब से देखा है।" इसके बाद उन्होंने अपने साथ पूर्व में हुई घटना का उल्लेख करने की कोशिश की, लेकिन उपसभापति ने कहा कि चर्चा के विषय से अलग कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं जायेगा।

उन्होंने कहा, "हम महिला सांसदों के ऊपर हिंसा को सामान्य घटना बनने देंगे तो हम जो 33 प्रतिशत महिला आरक्षण करने जा रहे हैं, हो सकता है कि उसके लिए महिलाएं सामने ही न आएं। जब महिलाएं सुरक्षित होंगी तो वे संसद और विधानसभाओं में आयेंगी और महिलाओं के अधिकारों की बात करेंगी।"श्रीमती मालीवाल ने कहा कि आज देश की महिलाएं बढ़-चढ़कर राजनीति में अपनी भागीदारी निभा रही हैं। इस बार के लोकसभा और बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया है। लेकिन सिर्फ वोट डालना ही चुनावों में भागीदारी नहीं होती। आज महिलाएं सिर्फ 13.6 प्रतिशत हैं। इस सदन में सिर्फ 17 प्रतिशत और विधानसभाओं में नौ प्रतिशत महिलाएं हैं। यह हमारे लोकतंत्र की सबसे स्पष्ट असमानता है। उन्होंने कहा कि जब महिला आरक्षण कानून जमीन पर लागू होगा तो देश में क्रांति जरूर आयेगी।

अपने सुझाव देते हुए आप सांसद ने कहा कि हर राजनीतिक दल में आंतरिक शिकायत समिति अनिवार्य होनी चाहिये। स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र होना चाहिये। महिलाओं के खिलाफ जितनी भी शिकायत आती हैं, उन्हें हर साल सार्वजनिक किया जाना चाहिये। हर शिकायत पर कार्रवाई रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी जानी चाहिये।

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