नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्र ने गुरुवार को कहा कि स्वच्छ ऊर्जा अब किसी एक क्षेत्र का एजेंडा नहीं रह गयी है, बल्कि यह विकास, प्रतिस्पर्धात्मकता, सामाजिक समावेशन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है।

श्री मिश्र ने इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट (इराडे) में 'सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांज़िशन-ग्लोबल पर्सपेक्टिव' विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ ऊर्जा 'विकसित भारत' के विज़न में गहरायी से समाहित है। उन्होंने इंडिया एनर्जी वीक के दौरान श्री मोदी के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एक विकसित भारत का निर्माण स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और सतत जीवनशैली पर आधारित होगा।

उन्होंने 2014 के बाद भारत के ऊर्जा परिवर्तन से दो प्रमुख सबक रेखांकित किए। पहला, महत्वाकांक्षी लक्ष्य तभी विश्वसनीय बनते हैं जब उन्हें सुदृढ़ संस्थागत ढांचे, सतत वित्तीय प्रतिबद्धता और निरंतर निष्पादन का समर्थन मिले। भारत द्वारा 2030 के बजाय 2025 तक 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा स्थापित क्षमता प्राप्त करने की दिशा में प्रगति और 100 गीगावाट सौर क्षमता का समय से पहले हासिल होना इसका उदाहरण है। दूसरा, ऊर्जा परिवर्तन तब अधिक टिकाऊ होता है जब वह प्रत्यक्ष कल्याणकारी लाभ देता है-जैसे पीएम-कुसुम का किसानों पर प्रभाव, पीएम सूर्य घर योजना से परिवारों को राहत और सौर विनिर्माण व ई-मोबिलिटी से रोजगार सृजन।

श्री मिश्र ने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए ऊर्जा परिवर्तन न्यायसंगत, समावेशी और विकासोन्मुख होना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत ने 2005-2020 के बीच जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता लगभग 36 प्रतिशत घटाई है और 2030 से नौ वर्ष पहले ही पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने वाला पहला जी-20 देश बना है।

उन्होंने ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर जोर देते हुए राष्ट्रीय सौर मिशन के विस्तार, जैव ईंधन नीति (2018) और राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (2021) का उल्लेख किया। साथ ही, परमाणु ऊर्जा को निजी भागीदारी के लिए खोलने को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कहा कि इससे 2047 तक स्थिर, शून्य-कार्बन बेसलोड बिजली में वृद्धि होगी।

श्री मिश्र ने कहा कि पीएम-कुसुम नीति नीति-समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जबकि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और उजाला एलईडी कार्यक्रम स्वच्छ ऊर्जा के लाभ सीधे घरों तक पहुंचा रहे हैं।

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