जयपुर , अप्रैल 18 -- राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कानून निर्माण में विधायी मसौदे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि विधायी मसौदे में स्पष्ट एवं सरल भाषा में जनता की इच्छाएं प्रतिबिंबित होनी चाहिए।
श्री देवनानी शनिवार को यहां राजस्थान विधानसभा में इन्टरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्रॉफ्टिंग विषय पर विधायी मसौदा तैयार करने के लिए 37वें अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे जो भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग योजना के तहत लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेन्ट्री रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसिस द्वारा आयोजित किया गया।
श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया अत्यन्त सावधानीपूर्वक और पारदर्शी तरीके से की जाती है। कानून में सर्वोत्तम गुणवत्ता के सभी पहलुओं का समावेश सुनिश्चित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विधेयक का प्रस्ताव की प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों से गुजरती है। विधेयक सदन में प्रस्तुत किया जाता है। द्वितीय चरण में विधेयक पर गहन चर्चा के साथ मसौदे को बेहतर बनाने के लिए अक्सर विशेष समितियों की मदद से हर पहलू का बारीकी से विश्लेषण कराये जाने के पश्चात सदन मतदान के लिए एकत्रित होता है। श्री देवनानी ने कहा कि कानून को सशक्त, समझने में आसान और वास्तव में जनता के हित में बनाने के लिए सम्पूर्ण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक सुनिश्चित किया जाता है। स्पष्ट और सरल भाषा का प्रयोग ही न्याय का सार होता है।
श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधानसभा लोकतंत्र का सच्चा मंदिर है। यहां सभी का एक साथ विकास करने और महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा कानून पारित कराये जाते है। विधानसभा अपने गौरवशाली स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रही है। राज्य के निर्माण के शुरुआती दिनों से लेकर आज के डिजिटल शासन के युग तक विधान सभा में लाखों लोगों के सपनों को कानून में तब्दील किये जाते है। 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा जनता की इच्छाओं को प्रतिबिंबित करने का कार्य करती है।
श्री देवनानी ने कहा कि अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाते हुए भारत अब अमृतकाल के मार्ग की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों की विशेष यात्रा के साथ भारत 2047 में स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ मनायेगा। यह समय हमारे राष्ट्र के लिए आत्म निरीक्षण करने और भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का है।
उन्होंने कहा कि गुलाबी शहर जयपुर का गुलाबी सदन राजस्थान विधानसभा पूरे देश के लिए आदर्श बन गया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधान सभा ने सभी विधायी अभिलेखों को डिजिटाइज करके सुदृढ भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है। यह परिवर्तन केवल कम्प्यूटर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाने और शासन को गति देने से भी संबंधित है। पारम्परिक राजस्थानी शैली और आधुनिक आवश्यकताओं के अनूठे मिश्रण के साथ विधान सभा भवन को सुंदर तरीके से बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि विधान सभा का महत्वपूर्ण हिस्सा आधुनिक डिजिटल संग्रहालय है। यह संग्रहालय जनता विशेषकर युवाओं से जुड़ने का एक सेतु है। यह राज्य की लोकतांत्रिक यात्रा और इतिहास को जानने का अवसर प्रदान करता है। सदन के कार्यों को समझने का माध्यम है। कानून निर्माण की प्रक्रिया को जनता के करीब लाता है।
श्री देवनानी ने विदेशी प्रतिभागियों से कहा कि राजस्थान विधान सभा के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के साथ चर्चा विधायी ज्ञान को बढ़ाएगी। ऐसे कार्यक्रम किताबों से परे जाकर अनुभव जानने के दुर्लभ अवसर हैं और संसदीय प्रक्रिया का वास्तविक ज्ञान भी होते हैं । कानून बनाना शासन की वैश्विक भाषा है, जिसे साझा करके हम सभी दुनियाभर में लोकतंत्र को मजबूत बनाने में सहभागी बनेंगे। श्री देवनानी ने कहा कि पधारो म्हारे देश की भावना को भारत की यात्रा से बेहतर ढंग से विदेशी प्रतिभागी समझ सकेंगे।
इस अवसर पर उन्होंने बंगलादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया, जाम्बिया सहित 17 देशों के 43 प्रतिभागियों से परिचय किया और उनके साथ सामूहिक फोटो भी लिया गया।
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