नयी दिल्ली , अप्रैल 12 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के उन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने राज्य के धान किसानों को बोनस न देने का निर्देश दिया है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा कि श्री स्टालिन के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और जानबूझकर लोगों को गुमराह करने के प्रयास के तहत लगाये गये हैं। उन्होंने कहा कि एक राज्य के मुख्यमंत्री से, जो एक संवैधानिक पद पर बैठे हैं, इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती है। तमिलनाडु के किसानों को एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो उनकी समृद्धि के लिए काम करे, ना कि उनकी चिंताओं को वोट के लिए हथियार बनाकर इस्तेमाल करे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पत्र देश में फसलों के विविधीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखा गया था, न कि सिर्फ तमिलनाडु के मुख्य सचिव को। इसमें राज्यों की बोनस नीतियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने का सुझाव दिया गया था। राज्यों के लिए केंद्र का यह सुझाव एक सकारात्मक और दूरदर्शी सोच पर आधारित है, जिसका उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और दालों, तिलहनों आदि जैसी फसलों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, ताकि किसान उन फसलों की खेती करके बेहतर मूल्य प्राप्त कर सके जिनकी घरेलू मांग आपूर्ति से कहीं अधिक है।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के ऊपर बोनस घोषित करना पूरी तरह से राज्य सरकारों का अधिकार रहा है और आगे भी रहेगा।

श्री स्टालिन के इस बयान के बाद केंद्रीय व्यय विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि राज्यों को इस साल 09 जनवरी को लिखा गया पत्र पूरी तरह से परामर्श था, न कि किसी प्रकार का निर्देश। विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्यों को भेजे गए पत्र में उनसे दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है जो पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण अनुकूल कृषि की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

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