पटना , नवंबर 21 -- बिहार के सभी शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों की बढ़ती उपस्थिति और उससे छात्रों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे को देखते हुये शिक्षा विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में बेहद सख़्त दिशा- निर्देश जारी किये हैं।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ बी राजेंद्र ने स्पष्ट कहा है कि स्कूल परिसर में भटकते कुत्तों का प्रवेश रोकना अब प्रत्येक संस्थान की अनिवार्य जवाबदेही होगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही को सीधे- सीधे सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना माना जायेगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों के जीवन के लिये गंभीर खतरा है। इसी आधार पर राज्य सरकार ने स्कूलों को कड़े सुरक्षा इन्तेजाम करने का निर्देश दिया है।

हर संस्थान को सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल की चारदीवारी या फेंसिंग पूरी तरह सुरक्षित और बिना गैप के हो, जिससे कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें। विद्यालय संचालन के दौरान मुख्य गेट बंद रहेगा और किसी भी खुले हिस्से को तुरंत सील करने का आदेश दिया गया है।

साथ ही परिसर में 'भटकते कुत्तों को भोजन न दें' बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाना है और संदिग्ध और आक्रामक कुत्तों की सूचना वार्ड पार्षद और स्थानीय प्रशासन को तुरंत देने का निर्देश दिया गया है। हर संस्थान एक नोडल अधिकारी नामित करेगा जो पशुपालन विभाग से नियमित संपर्क में रहेगा और कुत्तों के व्यवहार और प्रजनन से संबंधित जानकारी लेगा।

विद्यालय परिसर में कुत्तों को खाना देने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा और इसके उल्लंघन पर स्कूल प्रशासन सीधे जिम्मेदार होगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी रिपोर्ट में अनिवार्य रूप से एमडीएम खाद्य अपशिष्ट प्रबंधन की फोटो, किचन सुरक्षा संरचना, कचरा निपटान व्यवस्था, रसोईया एवं हेल्पर को प्रशिक्षण और विद्यालय परिसर में कुत्तों के प्रवेश रोकने की व्यवस्था।

यदि किसी स्कूल में बचा हुआ भोजन कुत्तों के आने का कारण पाया जाता है तो प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार माना जायेगा।

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